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- कांग्रेस द्वारा SC/ST/OBC की लिस्ट में मुस्लिमों आरक्षण पर क्या है विवाद....?
Posted by : achhiduniya
25 April 2024
राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में 23 अप्रैल को पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए
कहा कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर आरक्षण बढ़ाकर मुसलमानों को देने की कोशिश की
है। 2004 में
जैसे ही कांग्रेस ने केंद्र में सरकार बनाई थी, उसका पहला काम आंध्र प्रदेश में एससी/एसटी आरक्षण को कम
करना और मुसलमानों को देना था। जबकि संविधान इसके बिल्कुल खिलाफ है। बाबा साहब
अंबेडकर ने दलितों, पिछड़ों
और आदिवासियों को आरक्षण का अधिकार दिया था,उसे कांग्रेस धर्म के आधार पर मुसलमानों को देना चाहती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, आंध्र
प्रदेश में एससी/एसटी का आरक्षण करके मुसलमानों को देने का प्रयास एक पायलट प्रोजेक्ट था। इसे कांग्रेस पूरे देश में आजमाना चाहती थी। 2004 से 2010 के
बीच कांग्रेस ने चार बार आंध्र प्रदेश में
मुस्लिम आरक्षण लागू करने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जागरूकता के कारण वह अपने मंशा
पूरी कर पाए। 2011 में
कांग्रेस ने इसे देशभर में लागू करने की कोशिश भी की थी। कांग्रेस ने संविधान और बाबा साहेब अम्बेडकर की परवाह नहीं की,राजनीति और वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने इतने प्रयास
किए, ये
जानते हुए भी कि ये सब संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं। भारतीय संविधान के आर्टिकल 16 में कहा गया है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए सभी को
समान मौका मिलना चाहिए। किसी के साथ जाति, धर्म, लिंग
या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 16(4) के तहत राज्य को यह अधिकार मिलता है कि वे सरकारी नौकरियों में उन पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान करें जिन्हें राज्य की राय में सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। पिछड़े वर्गों में अनुसूचित जातियां (SC) और अनुसूचित जनजातियां (ST) भी शामिल हैं। बाला जी बनाम मैसूर राज्य (1963) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी समुदाय का पिछड़ापन सिर्फ जाति के आधार पर नहीं तय किया जा सकता है। इसमें उनकी गरीबी या वो कहां रहते हैं, इन बातों पर भी विचार करना होगा। कर्नाटक सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक के मुस्लिम समुदायों की सभी जातियों और वर्गों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग (OBC) की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है।
राष्ट्रीय पिछड़ा
वर्ग आयोग (NCBC) के
अनुसार, कर्नाटक
राज्य के सभी मुसलमानों को OBC श्रेणी
2B के
तहत माना गया है। कर्नाटक में फिलहाल ओबीसी वर्ग के लिए 32 फीसदी आरक्षण है। कुल 883 जातियों और उपजातियों को ओबीसी आरक्षण मिलता है। इसे
पांच कैटेगरी 1, 2A, 2B, 3A और
3B में
बांटा गया है। कैटेगरी 1 में
कुल 391 जातियां
और उपजातियां हैं. इनमें मुसलमानों की 17 जातियां
शामिल हैं। इन्हें 4 फीसदी
आरक्षण मिलता है। कैटेगरी 2A में
कुल 393 जातियां
और उपजातियां हैं। इनमें मुसलमानों की भी 19 जातियां हैं। इन्हें 15 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। कैटेगरी 2B में मुसलमानों की सभी जातियों को शामिल किया गया है।
इनके लिए राज्य में 4 फीसदी
आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है। ऐसे ही कैटेगरी 3A में 50 जातियों/उपजातियों
को 4% और
3B में
48 50 जातियों/उपजातियों
को 5% आरक्षण
मिलता है। वहीं टी देवदाशन बनाम भारत संघ (1964) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने
पिछड़े वर्गों की नौकरियों में खाली पदों को अगले साल तक रखने के नियम को
असंवैधानिक बताया है। अदालत ने माना कि अगर किसी भी साल में खाली पदों को भरने के
कारण आरक्षण 50% से
ज्यादा हो जाता है,तो
यह नियम संविधान के विरुद्ध है। यह 50% वाला
नियम सिर्फ अनुच्छेद 16(4) के
अंतर्गत बनाए गए सही आरक्षण पर ही लागू होता है।
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