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- धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने पर विरोध...
Posted by : achhiduniya
28 May 2024
मध्यप्रदेश
में मोहन सरकार का गठन हुआ था तो पहली कैबिनेट में यह धार्मिक स्थलों से
लाउडस्पीकर हटाने का
फैसला किया गया था कि धर्मस्थलों से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अतिरिक्त
लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे। इंदौर शहर काजी ने धर्म स्थलों को टारगेट करने का आरोप
लगाया। इंदौर शहर काजी इशरत अली अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ कलेक्टर आशीष सिंह से
मिलने पहुंचे। इस दौरान शहर काजी ने कलेक्टर को सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन का
हवाला दिया, जिसमें
यह कहीं नहीं लिखा है कि धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाएं। उन्होंने कहा कि
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में लिखा है कि 55 डेसीबल से ज्यादा आवाज लाउडस्पीकर
पर नहीं रखी जा सकती।
काजी इशरत अली ने कहा हम इस नियम को मनाने के लिए तैयार हैं। कम डेसीबल पर ही
लाउडस्पीकर चलाए जाएंगे। इसके साथ ही
उन्होंने धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का विरोध जताया। शहर काजी इशरत अली ने
कहा कि इंदौर में जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, जब हम ध्वनि प्रदूषण की बात करते हैं तो केवल
लाउडस्पीकर हटाने से ध्वनि प्रदूषण कम नहीं होगा बल्कि शादियों में जिस तरह से
जोर-जोर से आवाजों में डीजे बजाया जाता है, उस पर भी कार्रवाई करना जरूरी है। हम और आप अक्सर देखते
हैं कि जब किसी के घर में शादी होती है तो सड़कों पर बड़ी गाड़ियों में स्पीकर
लगाकर डीजे बजाते हुए लोग निकलते हैं,
उससे
भी कहीं ना कहीं ध्वनि प्रदुषण होता है,लेकिन, प्रशासन उस पर रोक नहीं लगा पा रहा है। शहर काजी इशरत
अली ने इंदौर कलेक्टर से मिलकर उनसे इस कार्रवाई को रोके जाने और सुप्रीम कोर्ट की
गाइडलाइन के अनुसार लाउडस्पीकर पर कार्रवाई करने की बात कही। वहीं कलेक्टर आशीष
सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि धर्म स्थलों पर लाउडस्पीकर की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार की जा रही है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा जो
निर्देश दिए गए थे वे भी इसमें शामिल किए गए हैं और नियम अनुसार ही कार्रवाई की जा
रही है। इंदौर में अभी तक 500 से
ज्यादा लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं।


