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- SC-ST Act सार्वजनिक जगह पर किए गए अपराध के तहत होगा लागू....इलाहाबाद हाई कोर्ट
Posted by : achhiduniya
23 May 2024
याचिकाकर्ता पिंटू कुमार औन दो अन्य लोगों के खिलाफ
नवंबर साल 2017 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और SC/ST कानून की धारा 3(1) (R) के तहत केस दर्ज किया
गया था। केस में आरोप था कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के घर में घुसकर उन्हें
जातिसूचक गालियां दीं तथा उसे और उसके परिवार को मारा-पीटा। इलाहाबाद हाई कोर्ट में
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि यह अपराध शिकायतकर्ता के घर के
भीतर हुआ। ये एक सार्वजनिक स्थल नहीं है और आम लोगों ने इस घटना को नहीं देखा।
वकील ने कहा कि इस कारण इस मामले में SC/ST कानून के तहत कोई अपराध
नहीं बनता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा
कि SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा तभी बनता है जब व्यक्ति को सरेआम
जानबूझकर अपमानित किया जाता है। वहीं, सरकारी वकील ने इस दावे
पर आपत्ति जाहिर की। हालांकि, वकील ने कहा कि इस घटना से इनकार
नहीं किया जा सकता ये सब शिकायतकर्ता के घर के भीतर हुआ। मामले पर दलीलें सुनने
के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता के बयान और प्राथमिकी से पता लग
रहा है कि घटना जिस जगह पर हुई है वहां कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं था।
इसके बाद
कोर्ट ने अपना आदेश दिया और कहा कि SC/ST अधिनियम की धारा 3(1)(R) के तहत यह जरूरी है कि
अपराध सार्वजनिक स्थान पर किया होना चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केस को रद्द
करते हुए कहा कि अगर अपराध आम लोगों के सामने हुआ है तो SC/ST कानून के प्रावधान लागू होंगे, लेकिन मौजूदा मामले में
ऐसा नहीं हुआ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी करते हुए कहा कि
जानबूझकर अपमानित करने के कथित कृत्य के लिए SC/ST एक्ट के तहत अपराध तभी बनेगा जब यह सार्वजनिक जगह पर किया गया हो।
इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पिंटू सिंह और दो अन्य लोगों की
याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए इनके खिलाफ SC/ST एक्ट की संबंध में मुकदमा रद्द कर दिया।
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