- Back to Home »
- State News »
- पश्चिम बंगाल विधानसभा में एंटी रेप बिल [अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक 2024] पास जाने क्या है कानून विशेष....?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में एंटी रेप बिल [अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक 2024] पास जाने क्या है कानून विशेष....?
Posted by : achhiduniya
03 September 2024
विधानसभा में बिल पर बहस के दौरान पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने साल 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में 20 साल की दलित महिला के साथ रेप और 2013 में बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में एक कॉलेज छात्रा की रेप और बर्बर हत्या के
साथ ही पिछले हफ्ते जयपुर में एक सरकारी अस्पताल में एक बच्चे के रेप का जिक्र
किया. उन्होंने
कहा,यूपी और गुजरात जैसे राज्यों
में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर असामान्य रूप से ज्यादा है। वहां न्याय नहीं है, लेकिन बंगाल की महिलाओं को अदालतों में न्याय मिलेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा में एंटी रेप बिल पास हो गया। ममता सरकार ने अपराजिता विधेयक को कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप
और हत्या की घटना के बाद विधानसभा में पेश किया था। इसके लिए विधानसभा का स्पेशल सत्र बुलाया गया
था। सत्र के
पहले दिन
आज एंटी रेप बिल पेश सदन में पेश किया गया था। सरकार ने इस बिल को अपराजिता
महिला एवं बाल विधेयक 2024 नाम दिया
है। इस दौरान
सीएम ममता बनर्जी ने विधानसभा में इस बिल के समर्थन में कई उदाहरण दिए। इस बिल के भीतर रेप और हत्या
करने वाले आपराधी के लिए फांसी की सजा का प्रावधान। चार्जशीट दायर करने के 36 दिनों के भीतर सजा-ए-मौत का प्रावधान। 21 दिन में
जांच पूरी करनी होगी। अपराधी
की मदद करने पर 5 साल की
कैद की सजा का प्रावधान। हर जिले
के भीकर स्पेशल अपराजिता टास्क फोर्स बनाए जाने का प्रावधान।
रेप, एसिड, अटैक और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ये टास्क फोर्स लेगी एक्शन। रेप के साथ ही एसिड अटैक भी उतना ही गंभीर, इसके लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान। पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ 3-5 साल की सजा का प्रावधान। विधेयक में रेप की जांच और सुनवाई में तेजी लाने के लिए BNSS प्रावधानों में संशोधन शामिल। सभी यौन अपराधों और एसिड अटैक की सुनवाई 30 दिनों में पूरी करने का प्रावधान। अपराजिता विधेयक को पारित होने के लिए राज्यपाल, राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होगी। विधानसभा में अपराजिता बिल पारित हो चुका है, अब इसे हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
इसके बाद इसे राष्ट्रपति से मंजूरी मिलना जरूरी है। 294
सदस्यीय राज्य विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस को 223 विधायकों का समर्थन है, इसीलिए इस बिल का पारित होना मुश्किल नहीं रहा। हालांकि इस विधेयक को राज्यपाल
और राष्ट्रपति दोनों की मंजूरी की जरूरत होगी
।



