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हवाला या दूसरे देशों से फंडिंग मदरसों की होगी जाँच उत्तराखंड सरकार अवैध रूप से संचालित मदरसों पर सख्त
Posted by : achhiduniya
24 March 2025
एक रिपोर्ट के अनुसार,उत्तराखंड में 500 से अधिक अवैध मदरसे संचालित हो रहे हैं,जिनके बारे में प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है। सबसे
बड़ा सवाल यह है कि इन मदरसों का संचालन कैसे हो रहा है और शिक्षकों व कर्मचारियों
का वेतन कहां से आ रहा है? सरकार को आशंका है कि इन मदरसों को धर्म की आड़
में हवाला या विदेशी फंडिंग के जरिए आर्थिक मदद दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर
सिंह धामी ने कहा कि जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इन मदरसों को दूसरे देशों
से फंडिंग मिल रही है या नहीं। मुख्यमंत्री धामी ने अवैध मदरसों की फंडिंग की जांच
के लिए जिला स्तर पर विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी प्रत्येक
मदरसे के दस्तावेज, बैंक खातों और आय-व्यय का पूरा ब्योरा खंगालेगी। राज्य
में करीब 450 मदरसे पंजीकृत हैं, जो शासन को अपने दस्तावेज
और आर्थिक गतिविधियों
का पूरा ब्यौरा देते हैं,लेकिन दूसरी ओर, 500 से अधिक मदरसे बिना किसी मान्यता के संचालित हो
रहे हैं। इन अवैध मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का सत्यापन और आर्थिक स्रोतों की
जांच की जाएगी। उत्तराखंड सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को
निर्देश दिए हैं कि अवैध मदरसों को मिलने वाले धन के स्रोत की पूरी जांच की जाए और
रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाए। सरकार को संदेह है कि इन मदरसों
को हवाला या दूसरे देशों से फंडिंग मिल रही है, जिसे लेकर व्यापक जांच की तैयारी की जा रही है। सरकार
इन मदरसों के स्रोतों और उद्देश्यों की गहन जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि
सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना अनुमति के मदरसे खोलकर शिक्षा के नाम पर अवैध
गतिविधियां चलाई जा रही है।
देहरादून जिला प्रशासन ने सोमवार को सहसपुर में एक बड़े मदरसे को अवैध निर्माण के मामले में सील कर दिया। मदरसे ने बिना किसी अधिकृत अनुमति के एक मंजिल का निर्माण कर लिया था। प्रशासन ने पहले ही इसे नोटिस जारी किया था, लेकिन मदरसा प्रबंधन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्माण कार्य जारी रखा। प्रदेश में पिछले एक माह से अवैध मदरसों के खिलाफ प्रशासन का कड़ा अभियान चल रहा है। अब तक पूरे प्रदेश में 136 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है। इन मदरसों के पास न तो पंजीकरण के वैध दस्तावेज थे और न ही उनके संचालन का कोई अधिकृत प्रमाण था।
कमेटी यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन मदरसों को किस स्रोत से फंड मिल रहा
है और इसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। यदि फंडिंग में कोई गड़बड़ी
या संदिग्ध लेन-देन पाया गया तो संबंधित मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।