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- महिलाओं को कौमार्य [वर्जिनिटी टेस्ट] परीक्षण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता..हाई कोर्ट
Posted by : achhiduniya
02 April 2025
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार
वर्मा की यह टिप्पणी एक व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका के जवाब में आई, जिसने अपनी पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करते हुए आरोप
लगाया था कि वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध में है। उसने 15 अक्टूबर, 2024 के एक
पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती दी, जिसने
अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया था।वहीं इस मामले में पत्नी ने आरोप लगाया था कि
उसका पति नपुंसक है और सहवास से इनकार कर रहा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि
याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित मेडिकल परीक्षण करा सकता है या कोई
अन्य सबूत
पेश कर सकता है। लेकिन उसे अपनी पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने तथा अपने साक्ष्य
में कमी को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दरअसल,9 जनवरी को
पारित आदेश हाल ही में उपलब्ध कराया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा
अपनी पत्नी की वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करना असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, जिसमें महिलाओं के सम्मान का अधिकार शामिल है। भारत के
संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी देता है, जो महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
हाई कोर्ट ने कहा,किसी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा
सकता। ये संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
है। ये अनुच्छेद महिला को सम्मान के अधिकार सहित जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के
मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। हाई कोर्ट ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट
की अनुमति देना मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक
न्याय के प्रमुख सिद्धांतों और महिला की लाज के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने इस बात पर
जोर दिया कि अनुच्छेद 21 मौलिक
अधिकारों का हृदय है।