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भगतों को मालामाल करने वाले महाकाल बाबा मंदिर को भक्तों द्वारा 6 सालों में चढ़ाया गया 210 करोड़ 72 लाख 5973 रुपए दान...
Posted by : achhiduniya
05 July 2025
उज्जैन मंदिर के
पुजारी के अनुसार मंदिर
में देश ही नहीं दुनिया भर में उनके जजमान हैं,
जो बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं. वे अपनी स्वेच्छा
से भगवान को सोने-चांदी का मुकुट, कुंडल,
छत्र, श्री
महाकाल लोक में चलने वाली ई कार्ट, भक्तों
के लिए कूलर, पंखे,
ऐसी का दान,
लोडिंग वाहन,
समय समय पर मंदिर में फूलों की साज-सज्जा,
श्रावण महीना,
नागपंचमी, महाशिवरात्रि
जैसे पर्वों पर विदेशी फूलों से बाबा का आंगन सुसज्जित करना और अन्य कई तरह से
भक्त अपनी भावना व्यक्त करने के लिए सेवा करते रहते हैं। महाकाल बाबा की भक्तों पर जैसे अपार कृपा है वैसे ही भक्त
भी दान देने में पीछे नहीं हैं। महाकाल के भक्त बाबा पर मोह माया
छोड़कर धन दौलत की बरसात कर रहे हैं और उनका खजाना भर रहे हैं। श्रावण महीने के पहले मंदिर समिति
ने बीते 6 सालों में मंदिर को मिली दान राशि साल 2018 से 2025 तक भक्तों ने दिल खोलकर 210 करोड़ 72 लाख 5973 रुपए दान किया है। खास बात यह है इसमें लड्डू प्रसादी, भस्मार्ती शुल्क दर्शन, श्रृंगार बुकिंग, आभूषण और अन्य से मिली राशि को नहीं जोड़ा गया है, ये सिर्फ दानपेटी, कैश, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, चेक के माध्यम से मंदिर को मिला
दान है।
वर्ष 2018
से 2021 तक
हर दिन 45 से
50 हजार
श्रद्धालु ही मंदिर पहुचं रहे थे। जिन्होंने
इस बीच 40 करोड़
69 लाख
49 हजार
489 रुपए
का दान किया।जबकि 2018
से 2025 के
दौरान का हिसाब लगाया जाए तो दान का आंकड़ा 210
करोड़ 72 लाख
5 हजार
973 रुपए
हो गया। 2021 के
बाद ये संख्या हर रोज एक से डेढ़ लाख हो गई। महाकाल
लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या तेजी से बड़ी है। साल
2023 से
2025 में
12 करोड़
32 लाख
से अधिक भक्त महाकाल बाबा के दर्शन करने पहुंचे। श्री
महाकाल लोक वर्ष 2022 के
अक्टूम्बर माह में भक्तों के लिए खोल दिया गया था।
उस समय 2021-2022
की दान राशि लगभग 20
करोड़ थी।
2022-2023
में दान राशि बढ़कर लगभग 39
करोड़ हो गई।
2023 से
2024 में
दान राशि लगभग 60 करोड़
तो 2024 से
2025 में
दान राशि 51 करोड़
22 लाख
39 हजार 268 रुपए
पहुंच गई। 64 किलो
आभूषण ऐसे है जो मंदिर की दानपेटी से कैश के साथ निकले हैं।
जिसमें हीरे की अंगूठी, बेशकीमती
घड़ियां, डॉलर
सहित अन्य देशों की मुद्रा भी शामिल है। साल
2024 में
3 करोड़
से अधिक का सोना-चांदी भी दान में मिला है।
1 जनवरी
2024 से
13 दिसम्बर
2024 तक
399 किलो
चांदी, जिसकी
कीमत करीब 2 करोड़
42 लाख
803 रुपए
है। इसके अलावा 1533
ग्राम सोना जिसकी कीमत 95
लाख 29 हजार
556 रुपए
है। मंदिर को कई तरह से दान मिलता
है।
इन आकंड़ों के अलावा मंदिर की
अपनी लड्डू प्रसादी यूनिट है। लड्डू
प्रसाद बेचकर, भोजन
शुल्क लेकर भोजन करवाया जाता है। इससे
अलग आय होती है, हालांकि
ये दोनों ही जगह नो प्रॉफिट नो लॉस वाला मंदिर मानता है। शीघ्र
दर्शन 250 रुपये
प्रति व्यक्ति शुल्क, 200 रुपये
भस्मार्ती दर्शन शुल्क, धर्मशाला
बुकिंग शुल्क, श्रृंगार,
ध्वजा बुकिंग,
उज्जैन तीर्थ दर्शन बस सेवा शुल्क से होने वाली आय
अलग है।