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चुनाव आयोग आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेजों के रूप में शामिल करें...सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
10 July 2025
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा
बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर तीखे सवाल किए और चुनाव
आयोग से कहा कि वह चल रहे अभियान के तहत मतदाता गणना के लिए आधार कार्ड, मतदाता
पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेजों के रूप में शामिल करने पर विचार करे। कोर्ट
ने कहा,प्रथम
दृष्टया उसकी राय है कि न्याय के हित में चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूचियों
के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र
आदि जैसे दस्तावेजों को भी शामिल करने पर विचार करना चाहिए। सुनवाई के दौरान चुनाव
आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ
अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने इस प्रक्रिया में
आधार को वैध दस्तावेज के रूप में शामिल किए जाने के संदर्भ में तर्क दिया कि यह एक
निश्चित बात का प्रमाण है कि मैं मैं हूं, या आप आप हैं। जस्टिस धूलिया ने
कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम कहता है कि इसे एक वैध दस्तावेज के रूप में लिया
जाना चाहिए। पहला सवाल नागरिकता का है,मुझे एक दस्तावेज दिखाना होगा कि यह मेरा घर
है, संपत्ति
है, बिक्री
पत्र है। दूसरा सवाल यह है कि क्या मैं
वही व्यक्ति हूं, जिसका मैं दावा कर रहा हूं। इसलिए, प्रत्येक दस्तावेज का एक उद्देश्य होता
है। 60 प्रतिशत
फॉर्म भरे जा चुके हैं और लगभग 5.5-6 करोड़ फॉर्म पहले ही भरे जा चुके हैं और उनमें से आधे
अपलोड हो चुके हैं। उन्होंने आधार अधिनियम का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि
आधार संख्या या प्रमाणीकरण अपने आप में आधार के संबंध में नागरिकता या निवास के
प्रमाण के रूप में कोई अधिकार प्रदान नहीं करता है।
न्यायमूर्ति धूलिया ने कहा,उदाहरण
के लिए, मुझे
एक जाति चाहिए और इसके लिए मैं अपना आधार कार्ड दिखाऊंगा। उसके आधार पर मुझे जाति
प्रमाण पत्र मिलेगा। जाति प्रमाण पत्र ग्यारह दस्तावेजों (SIR अभ्यास
के लिए आवश्यक) में से एक में है, लेकिन आधार उसमें नहीं है। जस्टिस धूलिया ने कहा,इतने
सारे दस्तावेज प्राप्त करने का आधार बनने वाले बुनियादी दस्तावेजों में से एक पर ECI विचार
नहीं कर रहा है। इस पर द्विवेदी ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह से आधार नहीं
है और सूची संपूर्ण नहीं है, लेकिन आधार के लिए चुनाव आयोग को इसे नागरिकता या निवास के प्रमाण के रूप में
मानने से मना किया गया है। पीठ ने आगे पूछा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का
मसौदा प्रकाशित करने के बाद क्या यह संभव है कि किसी का नाम उसमें शामिल न हो। इस
पर द्विवेदी ने जवाब दिया कि यह संभव नहीं है।
जस्टिस धूलिया ने पूछा मान
लीजिए, मैं
एक मतदाता था और अक्टूबर 2024 और जनवरी 2025 में संशोधन के बाद मेरा नाम उसमें
था और जब आप 1 अगस्त
को मसौदा प्रकाशित करेंगे, तो क्या मेरा नाम उसमें होगा? वरिष्ठ वकील ने जवाब दिया कि नाम उसमें होगा और इसके लिए एक फॉर्म पर
हस्ताक्षर करने होंगे। हम घर-घर जा रहे हैं और इसके लिए लाखों (लोगों) को नियुक्त
किया है।