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- धड़ल्ले से बनवा रहें अप्रवासी झूठे दस्तावेज़ों या गलत बयानी के आधार पर आधार कार्ड...
Posted by : achhiduniya
11 July 2025
दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई
को लेकर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिया था
कि वह सभी जिला में इसके लिए सघन अभियान चलाएं। इसके लिए दिल्ली पुलिस की भी मदद
लेने की बात कही थी। तब से लगातार घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। अब इस
समय बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां जो मतदाता सूची में संशोधन का काम
चल रहा है, वोटर
कॉर्ड और आधार कार्ड के मसले पर विवाद खड़ा हुआ, तब उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली
सरकार के मुख्य सचिव को भी इस दिशा में कार्रवाई करने को कहा है। दरअसल,उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के
मुख्य सचिव धर्मेंद्र कुमार को पत्र लिखकर दिल्ली में आधार कार्ड जारी करने के लिए
सख्त नियम लागू करने का आदेश दिया। यह आदेश अवैध प्रवासियों द्वारा बड़ी संख्या
में आधार कार्ड हासिल किए जाने के मद्देनजर किया गया है। मुख्य सचिव को 15 जुलाई
तक दिल्ली के सभी आधार
नामांकन केंद्रों की एक विस्तृत सूची उपलब्ध कराने को कहा
गया। मुख्य सचिव धर्मेंद्र कुमार को लिखे पत्र में उपराज्यपाल के प्रधान सचिव ने
लिखा है कि ध्यान में लाया है कि सुरक्षा समीक्षा बैठकों के दौरान कई मामलों में
अवैध अप्रवासी झूठे दस्तावेज़ों या गलत बयानी के आधार पर आधार कार्ड हासिल करने
में कामयाब रहे हैं। इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है, ऐसे व्यक्ति राष्ट्रीयता प्रमाणित
करने वाले दस्तावेज़, जैसे पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र, हासिल कर लेते हैं। वे केंद्र और
राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उठाते हैं। आधार
दस्तावेज़ हासिल करने के बाद, अवैध अप्रवासी नौकरियां हासिल कर लेते हैं,जिससे स्थानीय श्रम बाज़ार में मंदी आती है। स्थानीय
रोज़गार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव
पड़ता है। पत्र
में यह भी जिक्र किया है कि इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार में आधार
(नामांकन और संशोधन) नियम, 2016 के अंतर्गत रजिस्ट्रारों को
सौंपी गई
जिम्मेदारियों पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से क्षेत्र-स्तरीय
कार्यान्वयन, निगरानी
और सत्यापन प्रक्रियाओं के संबंध में,उन्होंने बताया है कि भारतीय
विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा 14.10.2022 को जारी कार्यालय ज्ञापन में
कहा गया है कि, जिसमें
राज्य सरकार को आउटसोर्स के तहत काम कर रहे रजिस्ट्रार/नामांकन एजेंसियों को 31 मार्च, 2023 तक इन-हाउस मॉडल में
स्थानांतरित करने के निर्देश जारी किए गए थे,लेकिन यह प्रणाली आज तक लागू
नहीं की गई है। मुख्य
सचिव से कहा गया है कि वे निर्देश दें कि सभी रजिस्ट्रारों को आधार (नामांकन और
संशोधन) नियम, 2016 के
प्रावधानों का सख्ती से पालन करने और दो महीने के भीतर आधार नामांकन के इन-हाउस
मॉडल पर स्विच करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
साथ ही स्थानीय नगर
निकायों सहित राज्य सरकार द्वारा स्थापित सभी नामांकन केंद्रों का व्यापक विवरण, उनकी
वर्तमान कार्यप्रणाली सहित, 15 जुलाई, 2025 तक प्रस्तुत किया जाए। उपराज्यपाल
की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि आधार नामांकन एक संवेदनशील प्रक्रिया है और
आधार जारी करने से पहले डेटा एकत्र करने वाले व्यक्ति की ज़िम्मेदारी तय करना
ज़रूरी है ताकि किसी भी चूक की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके। इसके अलावा,यूआईडीएआई
ने विभिन्न आयु समूहों (जैसे 0-5 वर्ष, 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष
से अधिक) के आधार नामांकन के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों के लिए विस्तृत निर्देश जारी
किए हैं। पंजीकरण विभाग को ऑपरेटरों और कर्मचारियों को यूआईडीएआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों
के अनुसार आधार नामांकन और अद्यतनीकरण के लिए दस्तावेज़ एकत्र करने के लिए
संवेदनशील बनाना चाहिए। अवैध प्रवासियों के आधार नामांकन और संशोधन में
कर्मचारियों की किसी भी लापरवाही के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।