- Back to Home »
- State News , Technology / Automotive »
- फेस ऑथेंटिकेशन से मिलेगा राशन डिजिटल ऐप प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बना हिमाचल प्रदेश
Posted by : achhiduniya
09 July 2025
हिमाचल में पहले ई-पीओएस मशीन में अंगूठा
लगाकर सस्ता राशन वितरित किया जाता था, लेकिन फील्ड में ई-पीओएस मशीन में
काफी अधिक व्यवहारिक दिक्कतें पेश आ रही थी, जिससे लोगों को राशन खरीदने के लिए
कई घंटों तक डिपुओं के बाहर खड़े रहना पड़ता था। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही
थी। ऐसे में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पीओएस मशीन में
अंगूठा लगाने की जगह फेस ऑथेंटिकेशन ऐप की प्रणाली को लागू किया है,जिसका ट्रायल
बिलासपुर में किया गया था, जो सफल रहा। हिमाचल प्रदेश में डिजिटल तकनीक एवं शासन विभाग (डीडीटीजी) ने
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत पात्र लाभार्थियों
को राशन वितरित करने के लिए 1 जुलाई से आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली की शुरुआत की गई है। जिसमें अब उचित मूल्य की दुकानों में उपभोक्ताओं का एंड्रॉयड फोन के माध्यम से फेस स्कैन करके राशन दिया जाएगा। ऐसे में इस प्रणाली को लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है। हिमाचल प्रदेश में राशन कार्ड धारकों की संख्या 19,40,968 है। इसमें 11,32,818 राशन कार्ड धारक APL हैं। वहीं, APL टैक्स पेयर की संख्या 60,870 है। इसके अलावा प्रदेश में BPL परिवारों की संख्या 2,80,300 है। इसी तरह से 3,05,072 प्राइमरी हाउस होल्ड (PHH) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत राशन कार्ड धारकों की संख्या 1,61,908 है। इन उपभोक्ताओं को अब फेस ऑथेंटिकेशन ऐप अब डिपुओं में राशन दिया जा रहा है। 28 जून को सभी जिलों के जिला खाद्य नियंत्रकों को भेजा गया।
यहां से ऐप का लिंक फूड इंस्पेक्टरों के माध्यम से सभी डिपो धारकों को भेजा गया। प्रदेश के कई डिपुओं में इस प्रणाली के माध्यम से राशन वितरित किया जा रहा है। एंड्रॉयड फोन के माध्यम से फेस स्कैन करते ही उपभोक्ताओं के राशन कार्ड पर दर्ज सभी सदस्यों की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। ये सब कुछ राशन कार्ड में दर्ज सदस्यों का नाम आधार कार्ड से लिंक होने की वजह से संभव हुआ है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक राम कुमार गौतम का कहना है कि फेस ऑथेंटिकेशन ऐप प्रणाली को 28 जून से प्रदेश भर में लागू किया गया है। ये सब कुछ प्रदेश सरकार के प्रयासों से ही संभव हो पाया है।