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- क्या सैलरी बढ़ेगी या बारह घंटे की होगी शिफ्ट...? नए लेबर कोड [लेबर रिफॉर्म्] से उभर रही कई शंकाए
Posted by : achhiduniya
29 December 2025
करीब पांच साल के इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने चारों लेबर
कोड्स के नियमों को लागू करने की तैयारी कर ली है। ये कोड 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर एक नया ढांचा तैयार करते हैं, जिसका दावा है कि यह मौजूदा आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों के
मुताबिक है। सरकार का कहना है कि इससे श्रमिकों को न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी
मिलेगी और संगठित व असंगठित दोनों सेक्टर के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे
में लाया जाएगा।
सरकार के मुताबिक 2025 श्रम
सुधारों के लिए एक टर्निंग पॉइंट रहा है। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि
अब फोकस सिर्फ कानून बनाने पर नहीं, बल्कि
जमीन पर असर दिखाने पर होगा। इसी कड़ी में 2026 में EPFO 3.0 लाने की
प्लानिंह है, जिससे
पीएफ निकासी, पेंशन
फिक्सेशन और बीमा क्लेम पहले से कहीं ज्यादा तेज और
आसान हो जाएंगे,लेकिन जहां
सरकार और उद्योग जगत इसे ऐतिहासिक सुधार बता रहे हैं, वहीं ट्रेड यूनियनें इसे मजदूर विरोधी करार दे रही हैं।
यूनियनों का आरोप है कि नए लेबर कोड के जरिए काम के घंटे बढ़ाने और नियोक्ताओं को
ज्यादा छूट देने की तैयारी है। 12 घंटे की
शिफ्ट की चर्चा ने इसी डर को और हवा दी है।
यूनियनों का कहना है कि इससे कामगारों
पर दबाव बढ़ेगा और जॉब सिक्योरिटी कमजोर होगी। इसी विरोध में फरवरी 2026 में देशव्यापी हड़ताल का ऐलान भी किया गया है। दूसरी ओर, उद्योग जगत का तर्क है कि नए कोड से अनुपालन आसान होगा, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। CII और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन जैसे संगठनों का मानना है कि आधुनिक
नियमों से वर्कप्लेस ज्यादा प्रोफेशनल और सुरक्षित बनेगा, साथ ही सोशल सिक्योरिटी का दायरा भी बढ़ेगा। दरअसल, 2026 से पूरी तरह लागू होने जा रहे नए लेबर कोड को लेकर यही
आशंकाएं और उम्मीदें साथसाथ चल रही हैं।
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