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- 400 करोड़ बैंक फ्रॉड,ED की बड़ी कार्रवाई,प्रत्युष कुमार सुरेका गिरफ्तार
Posted by : achhiduniya
18 January 2026
ED ने यह जांच CBI द्वारा
12 जुलाई 2016 को
दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। इस FIR में
श्री गणेश ज्वेलरी हाउस और उसके प्रमोटरों पर 25 बैंकों
के कंसोर्टियम से 2,672 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
है। जांच में सामने आया कि साल 2011–12 के दौरान ज्वेलरी कारोबार
के लिए लिए गए बैंक लोन को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया। यह पैसा M/s Alex Astral Power Pvt. Ltd और उससे जुड़ी कंपनियों के
ज़रिए लगाया गया। प्रत्युष कुमार सुरेका को 24 अप्रैल
2012 को इस कंपनी का जॉइंट
मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय कोलकाता
ने श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले
में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने प्रत्युष कुमार सुरेका को गिरफ्तार किया
है। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम
अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत की गई। ED की जांच में यह भी सामने
आया कि प्रत्युष सुरेका ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किए। एग्रीमेंट्स को
बैकडेट किया था। डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया था। डमी डायरेक्टर्स नियुक्त कर
फर्जी रिकॉर्ड बनाए थे। ED के
अनुसार, करीब 400 करोड़
की लागत वाला सोलर पावर प्रोजेक्ट, जिसमें 120 करोड़
इक्विटी और 280 करोड़ का बैंक फाइनेंस
शामिल था। इस रकम को फर्जी तरीके से 20 करोड़ से भी कम कीमत पर
ट्रांसफर किया गया।
यह ट्रांसफर सुरेका के नियंत्रण वाली कंपनियों के जरिए शेम
इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट के माध्यम से किया गया। यह ट्रांजैक्शन एक रिलेटेड पार्टी
डील थी, जिसका उद्देश्य एसेट की
वास्तविक वैल्यू को छिपाना और बैंकों को नुकसान पहुंचाना था। ED के मुताबिक, कई
बार मौका देने के बावजूद प्रत्युष सुरेका ने जांच में सहयोग नहीं किया और विदेश
भागने की कोशिश की। 5 जनवरी 2026 को
उन्हें कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने की कोशिश के दौरान लुकआउट सर्कुलर (LOC) के
आधार पर रोका गया। सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने, फरार
होने की आशंका और अपराध की आय को लगातार ठिकाने लगाने के जोखिम को देखते हुए उनकी
गिरफ्तारी की गई। जांच में यह भी सामने आया कि प्रत्युष सुरेका इस सोलर प्रोजेक्ट
की शुरुआत से ऑपरेशन और मैनेजमेंट से जुड़े हुए थे। उनकी वास्तविक नेटवर्थ बेहद कम
होने के बावजूद, सैकड़ों करोड़ की
संपत्तियां सर्कुलर ट्रांजैक्शन्स, एंट्री ऑपरेटर्स, फर्जी
दस्तावेज़ों और जटिल कॉरपोरेट ढांचे के ज़रिए उनके नियंत्रण में पहुंचाई गईं।


