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- गड़बड़ घोटाला-गोबर,गोमूत्र,दूध से बना मिश्रण करेगा कैंसर ठीक,सरकारी प्रोजेक्ट विवादों में
Posted by : achhiduniya
10 January 2026
जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान
विश्वविद्यालय में चल रहा प्रोजेक्ट कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध खर्चों
की वजह से जांच के दायरे में आ गया है।दरअसल,गाय
के गोबर, गोमूत्र
और दूध से बने मिश्रण पंचगव्य के ज़रिये कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में
क्रांतिकारी शोध का दावा करने वाला एक सरकारी प्रोजेक्ट विवादों में है। जांच रिपोर्ट के अनुसार
2011 से 2018 के बीच परियोजना के
खर्च में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। लगभग 1.92
करोड़
रुपये गोबर, गोमूत्र, बर्तन,
कच्चा
माल और मशीनों पर खर्च दिखाया गया,जबकि इन वस्तुओं की
बाज़ार कीमत कथित तौर पर केवल 15-20 लाख रुपये थी। इसके
अलावा शोध के
नाम पर गोवा और बेंगलुरु सहित कई शहरों की 23-24
हवाई
यात्राएं की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की टीम ने पंचगव्य
परियोजना की आड़ में गोवा की यात्रा की। यह
प्रोजेक्ट साल 2011 में लगभग 8
करोड़
रुपये के प्रस्ताव के साथ शुरू हुआ था, हालांकि सरकार ने इसमें
3.5 करोड़ रुपये की ही स्वीकृति दी थी। जिला प्रशासन को
मिली शिकायत के बाद संभागायुक्त ने कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अतिरिक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में
जांच समिति बनाई, जिसने अब अपनी रिपोर्ट
सौंप दी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग एक दशक के काम के बावजूद यह
परियोजना पंचगव्य के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर
बीमारियों का कोई इलाज विकसित
नहीं कर पाई। जांच अधिकारी एडिश्नल कलेक्टर रघुवर मरावी ने पुष्टि की कि
दस्तावेजों में स्वीकृत योजना से बाहर खर्च के संकेत मिले हैं। वहीं विश्वविद्यालय
ने सभी आरोपों को खारिज किया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 7.5
लाख
रुपये की कार खरीदी गई, जबकि यह मूल स्वीकृत
अनुमान का हिस्सा नहीं थी। ईंधन और रखरखाव पर 7.5 लाख रुपये से अधिक,
मजदूरी
भुगतान के नाम पर 3.5 लाख रुपये
और
मेज-कुर्सी व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर करीब 15 लाख रुपये खर्च दिखाया
गया। रिपोर्ट ने इन खर्चों को शोध के घोषित उद्देश्य के लिए अनावश्यक बताया है। सूत्रों
के मुताबिक रिपोर्ट में स्वीकृत बजट से बाहर जाकर और बाज़ार दरों से अधिक खर्च किए
जाने की ओर इशारा किया गया है।
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