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गुटखा, तंबाकू प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
Posted by : achhiduniya
22 January 2026
बीते 21 जनवरी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की
ओर से जारी अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एफएसएसएआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। ओडिशा में लोगों की
सेहत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। ओडिशा
सरकार ने गुटखा, तंबाकू
और निकोटीन से जुड़े सभी उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू कर दिया है। इसका
मतलब साफ है कि अब ओडिशा में गुटखा या किसी भी तरह के तंबाकू युक्त उत्पाद का
निर्माण, प्रोसेसिंग,
पैकेजिंग, स्टोरेज, परिवहन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री,कुछ भी नहीं किया जा सकेगा। इस प्रतिबंध के दायरे में केवल गुटखा ही नहीं,
बल्कि सभी तरह के चबाने वाले खाद्य पदार्थ
भी आते हैं जिनमें तंबाकू या निकोटीन मिला हुआ है। चाहे वह
फ्लेवर वाला हो,
खुशबूदार हो, किसी मसाले के साथ मिला हो या किसी और एडिटिव के
साथ,इन सब पर रोक है।
सरकार इस आदेश को खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के सेक्शन 2.3.4 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम,
2006 के तहत सख्ती से
लागू कर रही है। सरकार ने यह भी
स्पष्ट किया कि यह नया आदेश 3 जनवरी 2013 को जारी पुराने प्रतिबंध को भी पीछे छोड़ देता
है। पहले के आदेश में कई तरह की अस्पष्टताएं थीं, जिनकी वजह से अलग-अलग जगहों पर नियमों का पालन
अलग तरीके से हो रहा था।
अब नए आदेश से सभी तरह की शंकाएं खत्म कर दी गई हैं,
ताकि पूरे ओडिशा में एक-समान और सख्त
कार्रवाई हो सके। राज्य सरकार का कहना
है कि यह कदम तंबाकू-मुक्त समाज बनाने की दिशा में बेहद जरूरी है। खास तौर पर
बच्चों और युवाओं को तंबाकू और निकोटीन के खतरनाक असर से बचाने के लिए यह फैसला
लिया गया है। अधिसूचना में अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान संस्था का भी हवाला दिया
गया है, जो
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्गत काम करती है। इस संस्था के अनुसार जर्दा,
खैनी, गुटखा और फ्लेवर वाला चबाने वाला तंबाकू इंसानों
में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ हैं। सरकार ने बताया कि ये उत्पाद सिर्फ नशे की लत ही नहीं लगाते,
बल्कि मुंह, गले, इसोफेगस, पेट, पैंक्रियास, किडनी और गले के अंदरूनी हिस्सों यानी फैरिंक्स
और लैरिक्स के कैंसर से भी सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसके अलावा ये दांतों और
मसूड़ों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लोगों को लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य
समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


