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- बृहन्मुंबई महानगरपालिका को लेडी [महिला मेयर] करेगी लीड निकली लॉटरी
Posted by : achhiduniya
22 January 2026
मुंबई मेयर पद
चुनाव में इसको लेकर काफी कशमकश थी कि मेयर पद किस वर्ग में जाएगा। दरअसल,
मेयर चुनाव के बाद
हर बार चक्रानुक्रम आरक्षण से तय होता है कि मेयर पद एससी-एसटी,
महिला,
ओबीसी या किस अन्य
वर्ग को जाएगा। इस बार बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट ने 118 सीटों पर जीत दर्ज की थी,
लेकिन उसमें कोई
एससी वर्ग से नहीं था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा था कि अगर ये पद एससी वर्ग के लिए
आरक्षित होगा तो क्या होगा,जबकि उद्धव ठाकरे गुट से एससी वर्ग का पार्षद जीता था। मुंबई
BMC चुनाव के बाद मेयर किस वर्ग से होगा, इसका फैसला हो गया है। गुरुवार को
बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए लॉटरी से निकाला गया,
जो महिला के पक्ष
में गया। नवी मुंबई, पुणे और नाशिक नगर निगम में भी लॉटरी के
बाद महिला के खाते में मेयर पद गया है। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मुंबई BMC
समेत पुणे,
नागपुर और नाशिक के
मेयर की कुर्सी अब सामान्य श्रेणी (महिला) के लिए
आरक्षित कर दी गई है। उद्धव सेना
का आरोप है कि रोटेशन और आरक्षण की प्रक्रिया को सत्ता के फायदे के हिसाब से मोड़ा
गया है ताकि कुछ खास चेहरों का रास्ता साफ किया जा सके। सामान्य श्रेणी होने की
वजह से अब पार्टियाँ किसी खास वर्ग की महिला उम्मीदवार को खोजने की मजबूरी से आजाद
हैं। अब पार्टियां सीधे उस महिला पार्षद पर दांव लगाएंगी जो ट्रंप कार्ड साबित हो
सके। मेयर का चयन अब फ्लोर मैनेजमेंट और पार्टी की रणनीति पर टिका होगा। मुंबई,
पुणे,
नागपुर महापालिकाओं
में भी महिलाओं के हाथों में कमान होगी।
लॉटरी में यह पद भी महिलाओं को आरक्षित किया गया है। महाराष्ट्र की सियासत में आज का दिन बेहद अहम था, क्योंकि सबकी नजर सबसे शक्तिशाली महानगरपालिकाओं के मेयर पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी पर थी। मुंबई नगर निगम का सामान्य श्रेणी की ओपन कैटेगरी में आना महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि इसके बड़े सियासी मायने हैं। इससे जाति का बंधन खत्म हो गया है। साथ ही बड़े चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है। ओपन कैटेगरी होने का मतलब है कि किसी जातिगत समीकरण की मजबूरी नहीं होगी। अब हर पार्टी अपनी सबसे भारी-भरकम और लोकप्रिय महिला पार्षद को सीधे मैदान में उतार सकेगी। BMC पिछले तीन दशकों से शिवसेना का अभेद्य किला रही है, इसलिए खुला कोटा होने से बीजेपी और शिंदे गुट अब किसी ऐसी महिला चेहरे पर दांव लगाएंगे, जिसकी मुंबई की जनता में पकड़ सबसे मजबूत हो। अब लड़ाई प्योर पॉलिटिक्स और फेस वैल्यू पर शिफ्ट हो गई है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसी जगहों पर महिला आरक्षण होने से अब इन शहरों की कमान किसी लेडी मेयर के हाथ में होगी। निर्धारित तारीख पर उम्मीदवार पर्चा भरेंगे। मेयर का चुनाव जनता नहीं, बल्कि जानता द्वारा चुने गए पार्षद करते हैं। सदन की विशेष बैठक में पीठासीन अधिकारी की मौजूदगी में वोटिंग होती है। चुनाव से पहले पार्टियां व्हिप जारी करती हैं,अगर किसी पार्षद ने अपनी पार्टी के खिलाफ वोट दिया, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। जिस गठबंधन के पास बहुमत होगा,वही तय करेगा कि महाराष्ट्र के इन बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा।
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