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Posted by : achhiduniya
02 March 2026
यूपी के
मथुरा-वृंदावन की होली विश्व प्रसिद्ध है। यहां होली का त्यौहार कई दिनों तक मनाया
जाता है। यहां होली मनाने के लिए देश-विदेश से लोग जमा होते हैं। यहां कई तरह की
होली खेली जाती है, जिसमें लठमार होली, रंग होली और फूल वाली होली का क्रेज ज्यादा है। मथुरा-वृंदावन
भगवान कृष्ण और राधा रानी की नगरी है। रस और रंग यहां का मुख्य आकर्षण है। यहां
आने के बाद इंसान दुनियादारी भूलकर ऐसी होली खेलता है जो उसे ताउम्र याद रहती है।
यहां की होली वाकई बेहद खास होती है जो दुखी मन को भी आनंद से भर देती है। सुलभ
इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर विडोस के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर में भव्य
होली महोत्सव का
आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों विधवा माताओं ने अबीर-गुलाल और
फूलों के साथ होली खेलकर अपने एकाकी जीवन में खुशियों के रंग भरे। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक स्व. बिंदेश्वर पाठक
द्वारा शुरू की गई इस अनूठी पहल के अंतर्गत प्रतिवर्ष यह आयोजन किया जाता है। इसका
मुख्य उद्देश्य समाज की मुख्यधारा से कटी हुई और उपेक्षित विधवा महिलाओं को सम्मान
और उल्लास के साथ जीने का अवसर प्रदान करना है। सोमवार
को आयोजित इस उत्सव में विधवा और वृद्ध माताएं पूरी तरह भक्ति और उमंग के सराबोर
नजर आईं।
मंदिर परिसर भजन, होली के गीतों और रसिया की धुनों से गूंज उठा।
माताओं ने न केवल एक-दूसरे को गुलाल लगाया, बल्कि कान्हा की भक्ति में जमकर नृत्य भी किया। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों ने भी उपस्थित रहकर माताओं का उत्साहवर्धन किया
और उनके साथ मिलकर इस पावन पर्व की खुशियां बांटीं। ऐसे में विधवा माताओं का होली खेलना उनके एकांकी
जीवन में आनंद के रंग भरने जैसा है। यहां के आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम
में रंगकर जब ये माताएं होली खेलती हैं तो अपने सारे दुख दर्द भूल जाती हैं। होली
खेलने वाली माताओं का यही कहना है कि ये उत्सव उनके जीवन में उत्साह भर देता है


