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- भोजन करते समय बरते कुछ सावधानिया.....नही तो...?
Posted by : achhiduniya
18 September 2015
कई बार
भोजन करते
समय हम
इस बात
को भूल
जाते है
की भोजन
भी ईश्वर
के द्वारा
दिया गया
प्रसाद
है जिसे
खाने से
पहले कुछ
सावधानिया
बरतना
बेहद जरूरी
है।जैसे
@खाने
से पहले
हाथ धोना।@ शाम
होने से
पहले खाना
खा लेना
या सोने
से दो
घंटे पहले
खा लेना
इत्यादि-इत्यादि
और भी
ऐसी कई
बाते है
आइए आज
उन पर
एक नजर
डालते
है।@
पहली रोटी गाय के लिए तथा आखिरी श्वान के लिए बनानी चाहिए। भोजन को सबसे पहले इष्टदेव को भोग लगाने के बाद ग्रहण करना चाहिए।
@ भोजन आसन बिछाकर करें तो यह स्थिति सर्वश्रेष्ठ है। खड़े होकर या बिस्तर पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए।जैसा अक्सर शादियो की पार्टियो मे किया जाता है। लेटकर भोजन करने का भी शास्त्रों में निषेध है। हालांकि रोगावस्था में जो स्थिति सहज हो उसका पालन करना चाहिए।बीमार व्यक्ति की बात और है।@ जब भी
भोजन बनाए उस
समय स्नान तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन बनाते समय क्रोध, दुख आदि से दूर रहना चाहिए।@
भोजन सात्विक होना चाहिए। उसके साथ तामसिक पदार्थों तथा मादक पेय आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है, वह पाप तथा रोग का भागी होता है।
@
भोजन के बर्तन साफ और सुंदर हों। टूटे हुए, खंडित और बहुत पुराने बर्तनों में भोजन बनाने व
करने से सफलता के मार्ग में बाधाएं आती हैं।@
भोजन से पूर्व हाथ, पैर और मुंह को शुद्ध जल से धोना चाहिए। भीगे हुए पैरों के साथ भोजन करना शुभ फल देता है। शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, इससे दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
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हमेशा भोजन को अच्छे मन से मिले उस ईश्वर का प्रसाद समझकर ग्रहण करना चाहिए।क्योकि कहते है जैसा खाए अन्न वैसा बने मन इसलिए खाना खाते समय चिंता,क्रोध,तनाव बिलकुल भी न करे इससे खाया जाने वाला अन्न जहर तुल्य हों जाता है।