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- नवदुर्गा मे पूजन की विधी से जुड़ी जरूरी बाते व सावधानी..........
Posted by : achhiduniya
12 October 2015
देवी का
पूजन बहुत
ही सावधानी
पूर्वक
करना चाहिए, अगर
देवी के
पूजन मे
कोई भी
गलती हुई
तो देवी
तुरंत
नाराज
हो जाती
है।इसीलिए
जब भी
किसी पंडाल
मे देवी
विराजमान
की जाती
है, तो
पंडितो
के समूह
द्वारा
देवी के
पूजन का
पूरा ध्यान
रखा जाता
है।
ब्राह्मणो
द्वारा
9
दिनो तक
सारे विधिविधान
तथा मंत्रोउच्चार
बहुत ही
सावधानी
पूर्वक
किए जाते
है। जो
लोग घरो
मे देवी
को विराजमान
करते है, वह
भी पूजा
मे सारी
सावधानी
करते है। नवरात्री
घट स्थापना
तथा कलश
पूजन:- नवरात्रि
के पहले
दिन स्नान
आदि से
निवृत्त
होकर पूजा
का विधान
किया जाता
है। पूजन
के शुरवात
मे गणेश
जी का
आह्वान
किया जाता
है। माता
के नाम
से अखंड
जोत जलायी
जाती है।
अब
समय होता
है कलश
स्थापना
का कलश
स्थापना
के लिए
एक तांबे
के लोटे
मे पानी
भरकर उसमे
कुछ बुँदे
पवित्र
जल (गंगाजल, नर्मदाजल)
डालते
है, फिर
उसमे सवा
रुपया
डालकर
उसकी पूजा
अर्चना
करके कलश
को अनाज
के ढेर
पर देवी
के सामने
रखा जाता
है। इस
कलश मे
पान के
5
पत्ते
या आम
के 5 पत्ते
लगाकर
इस पर
नारियल
रखा जाता
है| अब
इसकी पूजा
करके कलश
के लोटे
पर मौली
( लाल धागा
) बांधा
जाता है।
कलश स्थापना
के बाद
बारी आती
है घट
स्थापना
की, परंतु
जो लोग
घट स्थापना
करते है
उन्हे
विशेष
पूजन के
साथ साथ
विशेष
सावधानी
भी रखनी
पड़ती है।
इसलिए
हर कोई
अपने घर
मे देवी
के घट
की स्थापना
नहीं करता।
घट स्थापना
के लिए
एक टोकरी
मे मिट्टी
भरकर माता
के ज्वारे
बोये जाते
है तथा
9
दिन तक
इनकी विशेष
देखभाल
की जाती
है। अब
9
दिन तक
हर जगह
अपने विधान
के अनुसार
देवी के
9
रूपो की
पूजा की
जाती ह, कई
लोग इन
9
दिनो तक
व्रत रखते
है, तो
कुछ लोग
निराहार
रहते है।
कहा जाता
है कि
जो लोग
अपने घर
देवी की
ज्योत
प्रज्वलित
करते है, उन्हे
अपना घर
बंद करके
बाहर नहीं
जाना चाहिए
या अगर
बाहर जाए
तो किसी
को घर
मे छोड़कर
जाये।अब
इन नवरात्री
के 9 दिनो
तक हर
कोई अपनी
मान्यता
अनुसार
देवी की
पूजा विधि
विधान
से करता
है,परंतु
अष्टमी
तथा नवमी
के दिन
पूजा का
अलग ही
महत्व
होता है।
अष्टमी
नवमी के
पूजन विधि
एवम महत्त्व
:-अलग
अलग क्षेत्रों
मे अष्टमी
नवमी की
पूजा के
अलग अलग
विधान
है। कई
जगह अष्टमी
या नवमी
पर कन्या
पूजन का
विधान
है। इस
दिन घरो
मे छोटी
छोटी लड़कियो
को बुलाकर
उन्हे
खाना खिलाया
जाता है।
कुछ लोग
पूड़ी छोले
तथा खीर
खिलाते
है, तो
कुछ लोग
हलवा पूड़ी
खिलाते
है, तो
कुछ लोग
दही चावल
खिलाते
है। कन्याओ
को देवी
का स्वरूप
मानकर
उनका पूजन
किया जाता
है। बंगाल
मे इन
आठ दिनो
मे बड़े
बड़े पंडालो
मे देवी
का पूजन
सभी लोग
साथ मिलकर
करते है।अंतिम
दिन पुष्पांजलि
देते है
और महिलाए
कुमकुम
की होली
खेलती
है ।
केरल
मे अष्टमी
के दिन
सरस्वती
पूजन का
महत्व
है। तो
राजपूतो
के यहा
अष्टमी
के दिन
उनकी कुलदेवी
की पूजा
की जाती
है। जैसे
कि कहा
जाता है
भारत मे
अनेकता
मे एकता
देखने
के लिए
मिलती
है। उसी
प्रकार
देवी की
पूजा जिस
किसी भी
रूप मे
हो, चाहे
किसी भी
तरीके
से हो, सबका
उद्देश्य
एक ही
रहता है।
सबकी कामना
यही रहती
है, कि
देवी को
प्रसन्न
करके मनवांछित
वरदान
कैसे पाया
जाए या
अपने कष्टो
को किस
तरह दूर
किया जाए। मित्र
अवेश नीरज
जी के
द्वारा प्राप्त
जानकारी
जो आप
सभी मित्रो
के साथ
सांझा
की गई।



