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- जीवनसाथी को शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति नहीं देना तलाक का आधार....सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
20 October 2015
तलाक के
बड़ते मामलो
मे कोर्ट
ने इस
व्यवस्था
के साथ
ही मद्रास
हाई कोर्ट
के उस
फैसले
को भी
सही ठहराया, जिसने
एक व्यक्ति
को इसी
आधार पर
तलाक की
अनुमति
दे दी
थी।सुप्रीम
कोर्ट के
जज एस.
जे. मुखोपाध्याय
की अध्यक्षता
वाली खंडपीठ
ने इस
बाबत अपने
फैसले
में कहा
कि नि:संदेह
जीवनसाथी
को पर्याप्त
कारणों
के बगैर
लंबे समय
तक यौन
संसर्ग
नहीं करने
देना मानसिक
क्रूरता
है।
सुप्रीम
कोर्ट
ने तलाक
से संबंधित
मद्रास
हाईकोर्ट
के फैसले
पर मुहर
लगाते
हुए कहा
कि लंबे
समय तक
जीवनसाथी
को शारीरिक
संबंध
बनाने
की अनुमति
नहीं देना
मानसिक
क्रूरता
है। ऐसे
में यह
तलाक का
आधार हो
सकता है। पत्नी
की उस
गवाही
को सुप्रीम कोर्ट
ने तवज्जो
देने से
इनकार
कर दिया, जिसमें
उसने कहा
कि वह
संतान
नहीं चाहती
थी इसलिए
उसने शारीरिक
संबंध
बनाने
से इनकार
कर दिया
था।
कोर्ट
ने लंदन
में रह
रहे पति
को निर्देश
दिया कि
वह अपनी
पत्नी
को एकमुश्त
40 लाख
रुपये
बतौर निर्वाह
खर्च दे।


