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जिस तरह से लोगों को ग्रॉसरी और सब्जियां घर पर मिलती हैं,उसी तरह शराब भी मिलेगी....राजस्व बढ़ाना एक मुख्य लक्ष्य
Posted by : achhiduniya
14 October 2018
हाल ही मे सामाजिक कार्यककर्ताओं की कड़ी प्रतिक्रियाओं के बाद महाराष्ट्र सरकार शराब की होम डिलेवरी की अपनी योजना को रोक दिया था। इससे
पहले कहा गया कि नशे में ड्राइविंग के बढ़ते मामलों को
रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार शराब की होम डिलेवरी की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता तो महाराष्ट्र ऐसा करने वाले देश का पहला राज्य बन जाता। टाइम्स ऑफ इंडिया की
रिपोर्ट के अनुसार राज्य के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह कदम शराब
इंडस्ट्री के लिए 'गेम चेंजर' हो सकता
है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ई कॉमर्स
कंपनियां देश में काम करती हैं। शराब की होम डिलेवरी का तंत्र भी उसी तरह काम
करेगा।
चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, जिस तरह से लोगों को ग्रॉसरी और सब्जियां घर पर मिलती हैं उसी तरह शराब भी मिलेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इससे पहले बावनकुले ने कहा था कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे कि जिन्होंने शराब ऑर्डर की है,वह शराब पीने के लिए न्यूनतम आयु की शर्त को पूरा करते हैं। शराब विक्रेता को आधार नंबर के जरिए खरीददार की पहचान करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने यह भी कहा कि बोतलों पर जियो टैग (किसी वस्तु के स्थान का पता लगाने के लिए तंत्र) किया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बावनकुले ने कहा, टैगिंग बोतल के ढक्कन पर की जाएगी।
हम मैन्युफैक्चरर से लेकर ग्राहक तक बोतल को ट्रैक कर सकते हैं। यह नकली शराब और तस्करी की बिक्री को रोकने में मदद करेगा। इस खबर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की कड़ी प्रतिक्रिया आई जिसके बाद चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा था कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। नाम उजागर न करने की शर्त पर आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस फैसले के पीछे राजस्व बढ़ाना भी एक मुख्य लक्ष्य है। अधिकारी ने बताया कि प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के चलते राजमार्ग के समीप स्थित करीब 3,000 शराब की दुकानों के बंद होने के चलते सरकार को अच्छे खासे राज्य कर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य के 2017-18 के राजस्व में उत्पाद शुल्क से 15,343 करोड़ रुपये आए थे। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें कम करने की वजह से राज्य के कोष में थोड़ी और कमी दर्ज की गई। अधिकारी ने कहा कि शराब की ऑनलाइन बिक्री एवं होम डिलिवरी से ज्यादा राजस्व जुट सकने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि यह निर्णय कब से प्रभावी होगा।
चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, जिस तरह से लोगों को ग्रॉसरी और सब्जियां घर पर मिलती हैं उसी तरह शराब भी मिलेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इससे पहले बावनकुले ने कहा था कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे कि जिन्होंने शराब ऑर्डर की है,वह शराब पीने के लिए न्यूनतम आयु की शर्त को पूरा करते हैं। शराब विक्रेता को आधार नंबर के जरिए खरीददार की पहचान करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने यह भी कहा कि बोतलों पर जियो टैग (किसी वस्तु के स्थान का पता लगाने के लिए तंत्र) किया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बावनकुले ने कहा, टैगिंग बोतल के ढक्कन पर की जाएगी।
हम मैन्युफैक्चरर से लेकर ग्राहक तक बोतल को ट्रैक कर सकते हैं। यह नकली शराब और तस्करी की बिक्री को रोकने में मदद करेगा। इस खबर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की कड़ी प्रतिक्रिया आई जिसके बाद चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा था कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। नाम उजागर न करने की शर्त पर आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस फैसले के पीछे राजस्व बढ़ाना भी एक मुख्य लक्ष्य है। अधिकारी ने बताया कि प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के चलते राजमार्ग के समीप स्थित करीब 3,000 शराब की दुकानों के बंद होने के चलते सरकार को अच्छे खासे राज्य कर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य के 2017-18 के राजस्व में उत्पाद शुल्क से 15,343 करोड़ रुपये आए थे। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें कम करने की वजह से राज्य के कोष में थोड़ी और कमी दर्ज की गई। अधिकारी ने कहा कि शराब की ऑनलाइन बिक्री एवं होम डिलिवरी से ज्यादा राजस्व जुट सकने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि यह निर्णय कब से प्रभावी होगा।


