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- खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह की 352वीं जयंती परिचय-प्रवचन के साथ...
Posted by : achhiduniya
13 January 2019
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के 10वें गुरु,जिन्होंने ही सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को
पूरा किया। साथ ही गोबिंद सिंह जी ने खालसा वाणी- "वाहेगुरु जी का खालसा,
वाहेगुरु जी की फतह" भी दी। खालसा पंथ की की रक्षा के लिए गुरु
गोबिंग सिंह जी मुगलों और उनके सहयोगियों से लगभग 14 बार यूध्द किए। उन्होंने जीवन
जीने के लिए पांच सिद्धांत भी दिए, जिन्हें 'पांच ककार' कहा जाता है। पांच ककार का मतलब 'क' शब्द से शुरू होने वाली उन 5 चीजों से है,
जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह के सिद्धांतों के अनुसार सभी खालसा सिखों
को धारण करना होता है। गुरु गोविंद सिंह ने सिखों के लिए पांच चीजें अनिवार्य की
थीं- केश,कड़ा,कृपाण,कंघा और कच्छा। इनके बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता।
सवा लाख से एक
लड़ाऊं,चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै
गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं। बैसाखी के दिन 1699 में उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना
की थी। गुरु गोबिंद सिंह की गिनती महान लेखकों और रचनाकारों में होती है। उन्होंने
जाप साहिब,अकाल उस्तत,बिचित्र नाटक,
चंडी चरित्र, शास्त्र नाम माला, अथ पख्यां चरित्र लिख्यते, ज़फ़रनामा और खालसा
महिमा जैसी रचनाएं लिखीं। बिचित्र नाटक को उनकी आत्मकथा माना जाता है, जोकि दसम ग्रन्थ का एक भाग है। आपको बता दें कि गुरु गोबिन्द सिंह की
कृतियों के संकलन का नाम दसम ग्रंथ है। इस बार 13 जनवारी को गुरु गोबिंद सिंह
जयंती मनाई जा रही है। गुरु गोबिंद सिंह जी की वाणी:- इंसान
से प्रेम करना ही, ईश्वर की सच्ची आस्था और भक्ति है। मैं उन
लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं। अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह
से अंधा है, वह मूल्यवान चीजों की कद्र नहीं करता है।
भगवान
के नाम के अलावा कोई मित्र नहीं है,भगवान के विनम्र सेवक इसी
का चिंतन करते और इसी को देखते हैं। ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में
अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें। अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते
रहेंगे तो वर्तमान भी खो देंगे। जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको
वास्तविक शांति प्राप्त होगी। मैं उन लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग
पर चलते हैं। ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और
बुराई को दूर करें। इंसान से प्रेम करना ही, ईश्वर की सच्ची
आस्था और भक्ति है। अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने
वालों की ही ईश्वर मदद करता है। जो कोई भी मुझे भगवान कहे, वो
नरक में चला जाए।
जब बाकी सभी तरीके विफल हो जाएं, तो हाथ
में तलवार उठाना सही है। असहायों पर अपनी तलवार चलाने के लिए उतावले मत हो,अन्यथा विधाता तुम्हारा खून बहाएगा। सबसे महान सुख और स्थायी शांति तब
प्राप्त होती है जब कोई अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देता है। हर कोई उस
सच्चे गुरु की जयजयकार और प्रशंसा करे जो हमें भगवान की भक्ति के खजाने तक ले गया
है। सत्कर्म कर्म के द्वारा, तुम्हे सच्चा गुरु मिलेगा और
उसके बाद प्रिय भगवान मिलेंगे, उनकी मधुर इच्छा से,तुम्हें उनकी दया का आशीर्वाद प्राप्त होगा। अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह से
अंधा है, वह मूल्यवान चीजों की कद्र नहीं करता है।
बिना गुरु
के किसी को भगवान का नाम नहीं मिला है। स्वार्थ ही अशुभ संकल्पों को जन्म देता है।
सेवक नानक भगवान के दास हैं,अपनी कृपा से, भगवान उनका सम्मान सुरक्षित रखते हैं। हमेशा अपने दुश्मन से लड़ने से पहले
साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लें और
अंत में ही आमने-सामने के युद्ध में पड़ें। आप अपनी जवानी, जाति
और कुल धर्म को लेकर कभी भी घमंडी ना बने उससे हमेशा बचे।




