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- जयकारों के साथ चारधाम यात्रा की विधिवत शुरुआत.....
Posted by : achhiduniya
07 May 2019
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगोत्री धाम में विधिवत हवन, पूजा-अर्चना, वैदिक
मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक रीति-रिवाजों साथ गंगोत्री के कपाट दोपहर 11.30 बजे खोले गए। इसी के साथ ही उत्तराखंड में यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के साथ ही चारधाम
यात्रा की विधिवत शुरुआत हो गई। यमुनोत्री धाम के कपाट भी दोपहर 1.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने
के मौके पर श्रद्धालुओं ने गंगोत्री में गंगा के जयकारों के साथ ही गंगा स्नान
किया तथा मां गंगोत्री के दर्शन किए। मंगलवार सुबह 8:40 बजे पर यमुना
की डोली खरसाली स्थित यमुना मंदिर से बाहर निकाली गई।
इसके बाद 8:45 पर यमुनोत्री के लिए रवाना हुई। रवाना होने से
पूर्व स्थानीय लोगों ने पारंपरिक लोक नृत्य किया। साथ ही यमुना की डोली को भव्य
रूप से सजाया। यमुनोत्री के कपाट आज दोपहर 1.15 बजे खोल दिए
गए। उधर, भैरव घाटी में रात्रि विश्राम के बाद आज
सुबह 7:30 बजे गंगा की डोली गंगोत्री के लिए रवाना
हुई। रवाना होने से पूर्व भैरव घाटी में स्थित भैरव मंदिर में भैरवनाथ की विधि
विधान से पूजा अर्चना की गई। भैरव को मां गंगा का द्वारपाल भी कहा जाता है।
मान्यता है कि बिना भैरव के दर्शन के गंगोत्री की यात्रा पूरी नहीं होती। इसलिए
भैरव घाटी के भैरव देवता का अपना महत्व है।
गंगोत्री में 9:30 बजे के करीब गंगा की डोली पहुंची, जिसके बाद गंगा लहरी, गंगा सहस्त्रनाम आदि का पाठ किया गया। दोपहर ठीक 11:30 बजे गंगोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल
दिए गए। चारधाम यात्रा के बेसकैम्प माने जाने वाले ऋषिकेश में भी आज अक्षय तृतीया
पर तीर्थनगरी ऋषिकेश के प्राचीन श्री भरत मंदिर में भी अक्षय तृतीया के दिन
श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। श्री भरत मंदिर में अक्षय तृतीया पर 108 परिक्रमा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है
कि भरत मंदिर की अक्षय तृतीया के दिन 108 अथवा 1008 परिक्रमाओं का फल श्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन के
समान होता है।
मंगलवार को अक्षय तृतीया के दिन सुबह से ही श्री भरत मंदिर में
परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। श्रद्धालुओं ने मंदिर की
परिक्रमा कर ऋषिकेश नारायण भगवान भरत का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने मंदिर में
गुरुवर सत्तू का प्रसाद भी चढ़ाया।



