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- मराठा आरक्षण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई मोहर....कोटे में की कटौती
Posted by : achhiduniya
27 June 2019
था। न्यायाधीश रंजीत मोरे और न्यायाधीश भारती डांगरे की खंडपीठ ने यह भी कहा
कि सरकार एसईबीसी के लिए एक अलग श्रेणी बनाने और उन्हें आरक्षण देने की हकदार है। गुरुवार
का बहुप्रतीक्षित फैसला राज्य सरकार के नवंबर 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली
याचिकाओं पर आया, जिसमें एसईबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय
को 16 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। उधर, मराठा आरक्षण की
संवैधानिक वैधता बरकरार रखने के कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को
स्वीकार किया है। इसके साथ ही, खास परिस्थिति में 50 फीसदी
आरक्षण की सीमा को भी पार किया जा सकता है। हालांकि, देवेन्द्र
फडणवीस के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राज्य अदालत से 16 प्रतिशत कोटा पर
पुनर्विचार करने का अनुरोध करेगा।
याचिकाकतार्ओं में से एक के वकील विजयलक्ष्मी
खोपड़े ने कहा कि अदालत ने नौ सदस्यीय एम. जी. गायकवाड़ आयोग की रिपोर्ट का भी
समर्थन किया, जिसमें मराठों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से
पिछड़े वर्ग के रूप में वगीर्कृत करने की बात कही गई थी। खोपड़े ने कहा कि न्यायाधीश
ने कहा कि सरकार द्वारा दिया गया आरक्षण पिछड़े वर्ग आयोग द्वारा प्रस्तुत
न्यायोचित आंकड़ों पर आधारित है। राज्य सरकार की तरफ से मराठा को सामाजिक और आर्थिक
तौर पर पिछड़ा घोषित करने के बाद 30 नवंबर 2018 को महाराष्ट्र विधानसभा ने एक बिल
पास करते हुए नौकरियों और शिक्षा में मराठा को 16 फीसदी आरक्षण दिए जाने का रास्ता
साफ किया था।


