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रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस ग्रुप अनिल अंबानी की अगुवाई वाली दो अन्य कंपनियों के बही-खातों में 5,500 करोड़ रु के लेनदेन में संदेह.... SBI
Posted by : achhiduniya
10 July 2019
आरकॉम, रिलायंस टेलिकॉम लिमिटेड और रिलायंस
टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में फंड की आवाजाही की जांच में संदिग्ध रिलेटेड
पार्टी ट्रांजैक्शंस, लोन की कथित एवरग्रीनिंग और ऐसी नामालूम सी
इकाइयों के साथ प्रेफरेंशल डीलिंग्स का पता चला जिनमें रिलायंस ग्रुप के कर्मचारी
ही डायरेक्टर थे। रिलायंस ग्रुप को पहले अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के नाम से जाना जाता था। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और
अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप की दो अन्य कंपनियों के बही-खातों में 5,500 करोड़ रुपये के ऐसे लेनदेन पकड़े हैं, जो सवालों के घेरे में हैं। यह जानकारी मामले से
वाकिफ चार लोगों ने ईटी को दी। मई 2017 से मार्च 2018 के बीच के ट्रांजैक्शंस पर जांच में गौर किया
गया था।
इसमें हजारों एंट्रीज के बीच तीन ऐसी बड़ी एंट्रीज पाई गईं, जिनके बारे में एसबीआई की अगुवाई वाले लेंडर
ग्रुप को संदेह है कि इनका संबंध फंड डायवर्जन से हो सकता है। लेंडर्स अब इन
डीलिंग्स की प्रामाणिकता तय करने के लिए ज्यादा गहराई से जांच करने पर विचार कर
रहे हैं। एसबीआई ने फंड फ्लो की स्टडी के लिए नवंबर 2017 में अकाउंटिंग फर्म बीडीओ का सहारा लिया था। रिपोर्ट क्रेडिटर्स की कमिटी को दे दी गई है। इस
रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर मैनेजमेंट से सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने बताया, जांच में कई
ऐसे ट्रांजैक्शंस का पता चला, जिनकी कोई तुक
नहीं दिख रही थी। गहराई से विश्लेषण करने पर पता चला कि ये कंपनी की ओर से की गईं
अजस्टमेंट एंट्रीज थीं। पैसे की आवाजाही का पता लगाने के लिए गहराई से जांच करनी
होगी।
रिपोर्ट देखने वाले लोगों से बातचीत से ईटी
को पता चला कि एक नामालूम सी इकाई नेटिजेन को मई 2017 में 4 हजार करोड़ रुपये के कैपेक्स अडवांस मिले थे। यह
रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों से कई ट्रांजैक्शंस के जरिए मिली थी। इतनी बड़ी रकम
से संदेह पैदा हुआ। बाद में इसके जरिए देनदारी खत्म होना दिखाया गया। कंपनी के
ऑडिटरों को कंपनी के फाइनैंशल्स में इस ट्रांजैक्शन की जानकारी देनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस इकाई (नेटिजेन)
को जिस तरह डिफाइन किया गया है, उससे यह
तकनीकी रूप से रिलेटेड पार्टी के दायरे में नहीं आती है। ग्रुप की ही एक अन्य कंपनी को इंटर-कॉर्पोरेट
डिपॉजिट के रूप में 600 करोड़ रुपये देने पर भी सवाल उठाए गए।
जांच में आरोप लगाया गया कि यह प्रेफरेंशल ट्रांजैक्शन हो सकता है।
लेटर ऑफ
क्रेडिट के जरिए कम से कम तीन-चार बैंकों के लोन की कथित एवरग्रीनिंग के 500 करोड़ रुपये के करीब एक दर्जन ट्रांजैक्शंस भी
जांच के दायरे में हैं। एसबीआई ने ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया। आरकॉम के
प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अभी इन्सॉल्वंसी में है और सवाल रेजॉलुशन प्रफेशनल अनीश
नानावटी से पूछे जाएं। नानावटी ने ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया। आरकॉम मई में
बैंकरप्ट्सी प्रोसेस में गई थी, जब अपीलेट
ट्राइब्यूनल ने उसके खिलाफ इन्सॉल्वंसी प्रोसीडिंग्स पर लगा स्टे हटा दिया था। [साभार]



