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प्रदूषण मुक्ति के लिए वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से लीक से हट कर नए समाधान खोजने का आह्वाहन किया..... उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने
Posted by : achhiduniya
30 October 2019
नागपुर: आज
नागपुर स्थित सीएसआईआर की प्रयोगशाला, नीरी
द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आयन्स को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ, प्रदूषणमुक्त
पर्यावरण स्थाई विकास की जरूरी शर्त है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के क्षय का सीधा असर देश की प्रगति और विकास पर पड़ता
है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण
क्षय के कारण भारत प्रति वर्ष रू 3.75 ट्रिलियन
की भारी कीमत चुकाता है। उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज देश के विभिन्न
भागों में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए,वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से लीक से हट कर नए समाधान खोजने का
आह्वाहन किया।
उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे सरकार के नेशनल क्लीन एयर
प्रोग्राम में सहयोग दें, जिसका लक्ष्य 2024 तक वायु प्रदूषण,PM 2.5 तथा PM 10 , के स्तर
में 20-30% तक की कमी लाना है। देश के शहरों में वायु प्रदूषण के खराब, बहुत खराब और खतरनाक स्तर पहुंचने पर चिंता व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने भारत में पर्यावरण की स्थिति पर सेंटर फॉर
साइंस एंड एन्वायरमेंट की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए बताया कि वायु प्रदूषण
प्रतिवर्ष देश में हो रही कुल मौतों में से 12.5% मौत के
लिए ज़िम्मेदार है। पर्यावरण और वायु प्रदूषण को देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती
बताते हुए। उपराष्ट्रपति
ने कहा कि हम विकास के बारे में कैसे सोच सकते हैं,जबकि
हमारे विकास के केंद्र, हमारे शहर, जहरीला धुआं उगल रहे है, जहां का
पानी और भूमि प्रदूषित हैं।
उपराष्ट्रपति ने गैरपारंपरिक और अक्षय ऊर्जा स्रोतों
के प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि जल स्रोतों की समय समय पर सफाई कर, उन्हें प्रदूषण से मुक्त कर, पुनर्जीवित
किया जाना अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि अध्ययनों से साबित हुआ है कि प्रदूषण और
विकिरण कैंसर के बड़े कारण हैं। अतः नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को इस व्याधि की रोकथाम के
लिए पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने के समाधान खोजने होंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा
कि देश की प्रगति नागरिकों के स्वास्थ्य और खुशहाली पर आधारित होती है। हर नागरिक
को खुशहाल जिंदगी और प्रगति के लिए पर्याप्त अवसर मिलने ही चाहिए। उन्होंने कहा कि
यह समझना आवश्यक है कि सामाजिक आर्थिक विकास की अवधारणा में पर्यावरण और स्वास्थ्य
अंतर्निहित हैं, अतः वैज्ञानिक और शोधकर्ता पर्यावरण प्रदूषण के
कारणों और उनके सम्यक समाधान खोजें।
उपराष्ट्रपति ने सीएसआईआर और नीरी द्वारा
नदियों तथा जल जागृति के लिए चलाए जा रहे जन शिक्षण कार्यक्रम जागृति अभियान- एक
समाज, एक लक्ष्य का
शुभारंभ करते हुए,वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से समाज विशेषकर
युवाओं का पर्यावरण सम्मत जीवन शैली अपनाने के लिए मार्गदर्शन करने का आग्रह किया।
उन्होंने आग्रह किया कि हैं शिक्षण अभियान सरल स्थानीय भाषाओं में प्रचारित किए
जाने चाहिए जिससे वे आम जनता के लिए सुग्राह्य हों। इस अवसर पर राज्य सभा के
माननीय सदस्य डॉ विकास महात्मे, नीरी के निदेशक डॉ राकेश कुमार
सहित देश विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।


