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- भीमा कोरेगांव और मराठा आंदोलन के 808 केस वापस लेने का ऐलान किया महाराष्ट्र सरकार ने...
Posted by : achhiduniya
27 February 2020
पुणे पुलिस के अनुसार 31 दिसंबर, 2017 को माओवादियों ने समर्थन से पुणे में एल्गार परिषद के
सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए गए थे,जिसके कारण अगले दिन जिले
में कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक में जातीय हिंसा हुई थी। दक्षिणपंथी धड़े के नेता मिलिंद एकबोटे और
सांभाजी भीड़े कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में आरोपी हैं। पुणे पुलिस ने एल्गार
परिषद मामले में माओवादियों से संबंध के आरोप में वामपंथी विचारधारा के सामाजिक
कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र
गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फेरीरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को गिरफ्तार किया है।
पवार ने इससे पहले इन
गिरफ्तारियों को गलत और बदला लेने के इरादे से की गई गिरफ्तारी बताया था और पुणे
पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के
गठन की मांग की थी। वही बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस
ने आरोप लगाया था कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार कोई ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद
कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में हिंदुत्ववादियों (हिंदू
समर्थकों) को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था,मेरे कार्यकाल के दौरान राज्य के गृह विभाग ने कोरेगांव भीमा हिंसा मामले
में व्यापक जांच की थी।
फडणवीस के कार्यकाल के दौरान गृह विभाग का प्रभार भी उनके
पास ही था। उन्होंने कहा था,हिंसा पर राकांपा प्रमुख शरद
पवार की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि इसके पीछे हिंदुत्ववादियों का हाथ है,लेकिन पुलिस को उनके दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला। महाराष्ट्र
सरकार में मंत्री अनिल देशमुख ने जानकारी दी कि भीमा कोरेगांव केस से जुड़े कुल
649 मामलों में से 348 मामले महाराष्ट्र सरकार वापस ले रही है। साथ ही मराठा आंदोलन के कुल 548 केस में से 460
मामलों को भी सरकार ने वापस लेने की घोषणा की है।


