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- सिखों का मार्शल आर्ट “गतका” जाने क्या और क्यू है खास....?
Posted by : achhiduniya
31 December 2020
आपने जूरों कराटे का नाम तो सुना ही है जिस प्रकार उसमें फुर्ती और गति मायने रखती है उसी प्रकार गतका में गति और तालमेल का कमाल का होता है। इस युद्धकला को देखने वालों में भी जोश का अनुभव होता है। “गतका” यानि सिख मार्शल आर्ट (युद्ध कला)। सिख गुरुओं ने गतका को मानवता की भलाई के लिए समर्पित किया। गतका में गति और तालमेल के विशेष मायने हैं। सिखों के छठे गुरु
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी को गतका शब्द का जन्मदाता माना जाता है। जुल्म और अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए गतका शस्त्र कला को इस्तेमाल में लाया गया। सिख इसे बतौर मार्शल आर्ट और स्पोर्ट्स के तौर पर बड़े चाव से सीखते हैं। निहंग सिख योद्धाओं को अक्सर इस युद्धकला का प्रदर्शन करते देखा जाता है। नगर कीर्तन जैसे सिखों के धार्मिक उत्सवों में इस कला का प्रदर्शन किया जाता है। इसे पारंपरिक कपड़ों में तलवार और ढाल के सहारे खेला जाता है। युवाओं को गतका
की ट्रेनिंग देने वाले सुखचैन सिंह के अनुसार,आने वाली पीढ़ी को इसकी जरूरत है। यह हमारा पुरातन पारंपरिक खेल और मार्शल आर्ट है। इस शस्त्र विद्या के जरिए हम विजय प्राप्त करते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए हर एक इंसान को ऐसी विद्या की जरूरत होती है। सुखचैन सिंह ने शुरुआत में अकेले गतका की ट्रेनिंग देना शुरू किया,लेकिन अब ट्रेनर्स की पूरी टीम उनके साथ मौजूद है। सुखचैन सिंह कहते हैं,गतका सीखने से आपका धैर्य, आत्म नियंत्रण और अनुशासन बढ़ता है। महिलाओं के
लिए भी गतका सीखना बहुत उपयोगी है। इस मार्शल आर्ट को सीखने के बाद महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती।



