Posted by : achhiduniya 23 May 2023

श्री गुरु अरजनदेव जी महाराज सिख धर्म के पांचवे गुरु के रूप में शोभायमान है। अपने जीवन काल में मानवता के उद्धार के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब व सुखमनी साहिब की रचना कर नाम जपने के लिए संगत को प्रेरित किया। पंजाब स्थित अमृतसर में हरमन्दर साहिब का ताल सजाया जिसे आज हम गोल्डन टेंपल के नाम से जानते है। जहां चौबीस घंटे पेट व आत्मा की भूख मिटती है,अर्थात 24 घंटे लंगर व निरंतर कीर्तन चलता है। गुरु जी अलौकिक शक्तिवाले अवतारी पुरुष थे। उन्होंने अपने जीवन काल में लोक कल्याण हेतु अनेक परोपकार के कार्य किए। लोगों को विकारो से हटाकर परमात्मा के नाम से जोड़ा। गुरुजी बहुत ही नम्र, उदार दिल व स्वभाव से दयालू 
थे। उन्होंने हमेशा ही सभी का भला किया। एक बार की बात है शिवजी का उपासक महेशा नाम का जोगी जिसकी उम्र करीब 500 वर्ष थी, उसने शिवजी की बहुत कठिन तपस्या की थी। एक बार वह दूसरे टापू पर जाने के लिए समुद्र के जहाज में बैठ गया। जहाज चलते-चलते अचानक रुक गया तब जहाज के मालिक ने वहां बैठै ज्योतिषियों से पूछा कि इस विपत्ती से कैसे बचा जा सकता है ? ज्योतिषियों ने ज्योतिष सोधकर कहा जिस किसी का कोई भी न हो उसकी यदि बली दी जाए तो जहाज बच सकता है। जहाज में सभी ओर नजर घुमाई तो पाया गया कि सब यात्रियों में से इस जोगी का कोई नहीं है, तब बली स्वरुप उस जोगी को उठाकर समुंद्र में फेंका गया। जिस बड़े मछ ने जहाज को रोका हुआ था उसने जोगी को साबित ही निगल लिया पर कुछ फासले पर जाकर जोगी को किनारे पर उगल दिया। इस प्रक्रिया में जोगी का मुद्रा सहित कान कट गया। वहां से चलकर जोगी गणशंकर नाम के गांव के बाहर एक गुफा बनाकर कठिन तप करता रहा। एक दिन गुफा के बाहर आकर बैठ गया और आने जाने वालों से कहने लगा कि जो भी मेरा दर्शन करेगा उसे एक साल स्वर्ग की प्राप्ती होगी। यह बात सुनकर गणशंकर व आसपास के गांव के काफी लोग जोगी का दर्शन करने आने लगे। 
इसी गांव में गुरु अरजनदेव महाराज का सिख भाई तिलका भी रहता था पर वह जोगी का दर्शन करने नहीं आया। जोगी ने पूछा यहां कोई दर्शन कीए बगैर रहा तो नहीं। बताया गया भाई तिलका नहीं आया। जोगी ने तिलके को बुलाने के लिए संदेश भेजे परंतु वह नहीं आया। जोगी ने यह कहलवाकर भेजा यदि तुम दर्शन करने आओगे तो मैं तुम्हें दो सालो का स्वर्ग सुख दूंगा। भाई तिलका फिर भी नहीं आया। जोगी ने चार साल का स्वर्ग सुख देना कह भेजा फिर भी वह सिख नहीं आया। इस तरह लालच देते-देते जोगी ने कहा मैं तुम्हें सारी उम्र स्वर्ग सुख दूंगा तुम एक बार जरुर मेरा दर्शन कर स्वर्गफल प्राप्त करो पर गुरु का प्रेमी सिख फिर भी नहीं आया तो उत्सुक जोगी स्वयं चलकर उसके दरवाजे पर आकर खड़ा होकर कहता है कि मेरे दर्शन करके पूरी उम्र स्वर्ग सुख प्राप्त कर लो वर्ना खाली रह जाओगे। सिख ने कहा मैं अपने गुरु की कृपा से स्वर्ग और नरक से रहित हो चुका हूं। मुझे स्वर्ग सुख लेने की कोई इच्छा नहीं। यह बात सुनकर जोगी ने विचार किया यह जरुर कोई पूर्ण सिख है और इसका गुरु भी पूर्ण है। जोगी ने पूछा तुम्हारा गुरु कौन है, कहां रहता है ? सिख ने कहा मेरे गुरु श्री अर्जनदेवजी, अमृतसर साहिब में रहते हैं। जोगी ने कहा मुझे भी उनके दर्शन करवाओ तब सिख ने परोपकार समझकर जोगी के साथ अमृतसर प्रस्थान किया। चलते-चलते जब अमृतसर के करीब पहुंचे तो जोगी ने पूछा तुम्हारे गुरु की उम्र कितनी है ? सिख ने कहा करीब चालीस साल। जोगी ने कहा मेरी उम्र 500 साल के करीब है और तुम्हारे गुरु की उम्र बहुत छोटी है, मैं उनका उपदेश कैसे ले 

सकता हूं। मैं नहीं चलूंगा। मैं यहीं पर बैठता हूं, तुम दर्शन कर आओ फिर वापस लौट चलेंगे। जोगी वहीं बैठ गया, भाई तिलका गुरुजी के दर्शन करने गया। भाई तिलके ने गुरुजी को माथा टेका तो अंतर्यामी गुरुजी ने कहा जिसे साथ में लाए हो, उसे बाहर क्यों बिठाया है ? सिख ने कहा उसे अपनी बढ़ी उम्र का अभिमान है, इस कारण वह बाहर ही बैठ गया है। परोपकारी, दयालू गुरुजी ने कहा तुम जोगी से कहो कि यदि तुम्हें दर्शन नहीं करने हैं तो बीच में कनात लगा देते हैं परंतु ज्ञान चर्चा तो करें। सिख ने जाकर जोगी को जब यह बात बताई। जोगी अंदर आ गया और कनात के दूसरे तरफ बैठ गया। अंतर्यामी गुरुजी ने कहा जोगी जी आपका कान और मुद्रा कहां है ? यह सुनकर जोगी बड़ा हैरान हो गया ! सोच में पड़ गया कि पहले तो कभी इनसे भेंट नहीं हुई फिर भी इन्हें यह बात कैसे मालूम पड़ी ! अवश्य ही यह सिद्ध अंतर्यामी महापुरुष हैं। इतने में गुरुजी ने मुद्रा सहित कान कनात के दूसरी तरफ जोगी की झोली में फेंक दिया। यह देखकर हैरान जोगी सोचने लगा यह कान और मुद्रा तो मेरा ही है। तब जोगी को पक्का निश्चय हो गया कि गुरुजी अलौकिक शक्तिवाले अवतारी पुरुष हैं। अपने मन से अभिमान त्याग कर बड़ी श्रद्धा से कनात हटाकर गुरुजी के चरणों में गिर पड़ा और गुरुजी से उपदेश ग्रहण किया। गुरुजी इस संसार में करीब 43 वर्ष रहे। उन्होंने मानवता के लिए ज्येष्ठ सुदी 4 संवत 1663 को अपनी शहीदी दी जिसकी इसवर्ष समगणित अंग्रेजी तारीख 23 मई 2023 मंगलवार के दिन है। ऐसे महान परोपकारी, दयालू सतिगुरु को उनकी शहीदी दिवस पर हमारा शत-शत नमन। संयोजक अधि. माधवदास ममतानी श्री कलगीधर सत्संग मंडल इंदिरा गांधी कालोनी,जरीपटका नागपुर-440 014 [ 0712-2642094]

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