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- महाराष्ट्र नकली दस्तावेजों के जरिए 3000 करोड़ इमारत निर्माण घोटाले का हुआ पर्दा फ़ाश, मिला था RERA क्लीयरेंस..
महाराष्ट्र नकली दस्तावेजों के जरिए 3000 करोड़ इमारत निर्माण घोटाले का हुआ पर्दा फ़ाश, मिला था RERA क्लीयरेंस..
Posted by : achhiduniya
12 August 2023
विरार पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र कांबले ने बताया कि
इमारतों का निर्माण नकली स्टैम्प के साथ फर्जी डॉक्यूमेंट्स जमा करके RERA की अनुमति लेने के बाद
किया गया था। आरोपियों के पास से कलेक्टरों, वसई-विरार नगर निगम, टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट, उप-रजिस्ट्रार, एमएमआरडीए के आर्किटेक्ट और
इंजीनियरों समेत कुल 155 नकली रबर स्टैम्प बरामद किए गए हैं। साथ ही पुलिस ने फर्जी लेटरहेड
को भी जब्त किया है। गौरतलब है
की मुंबई से सटे विरार में एक बड़ा घोटाला सामने आया है।
यहां पुलिस ने 5
ऐसे
आरोपियों को
गिरफ्तार किया है जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए वसई विरार इलाके में कई
इमारतें बनाई और हजारों लोगों को उसे बेच दिया। इन इमारतों में बने फ्लैट्स की
कीमत 15-20
लाख रुपये हैं। विरार
पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि इस तरह की 55 से अधिक इमारतें हैं जिन्हें रेरा (Real Estate Regulatory
Authority) की तरफ से क्लीयरेंस भी दिया गया है। गिरफ्तार किए गए 5 लोगों में रियल एस्टेट डेवलपर, एजेंट, होम लोन प्रोवाइडर, रबर स्टैम्प बनाने वाले भी शामिल
हैं। पुलिस को शक है कि ये आरोपी साल 2015 से ही इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक इन इमारतों के फ्लैट्स में रहने वाले परिवारों की संख्या लगभग 3500 है। ये सभी लोग निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिन्होंने अपने जीवन की पूरी कमाई घर लेने में लगा दी है। पुलिस की जांच में अब तक पता चला है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आदिवासियों की खेती वाली जमीन को नॉन एग्रीकल्चर लैंड में बदल देते थे। इसके बाद रेरा में फर्जी डॉक्यूमेंट्स जमा कर मंजूरी ले लेते थे। एक अधिकारी ने बताया की RERA द्वारा क्लीयरेंस मिलने के कारण बड़े-बड़े बैंक इन घरों के लिए आराम से होम लोन दे देते थे।
पुलिस के
मुताबिक यह घोटाला लगभग 3 हजार करोड़ का हो सकता है। चौंकाने वाले बात यह है कि इस घोटाले
में 3500 परिवार फंस चुके हैं। इन
इमारतों में खरीददारों को पीएमओ से 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली है। गिरफ्तार मुख्य आरोपी
प्रशांत पाटिल को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। प्रशांत सिंधुदुर्ग जिले के एक
किसान का बेटा है, जिसने दसवीं तक की पढ़ाई की है। साल 2010 में नौकरी की तलाश में
वह विरार आया था। यहां उसे पता चला कि रियल एस्टेट में बड़ा स्कोप है। इसके बाद
प्रशांत ने कोपरी गांव में अपना
ऑफिस खोला। पाटिल जब 20 साल का था तब उसे अपना पहला ग्राहक मिला, जिसकी मदद से उसे रियल एस्टेट
क्षेत्र में कामयाबी मिली।
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