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- रिश्वतखोर CBI अफसर के कारण अटका करोड़ों का नर्सिंग घोटाला अब हुआ उजागर....
Posted by : achhiduniya
24 May 2024
मध्य प्रदेश नर्सिंग
घोटाला एक शिकायत
के आधार पर 2021 में
नर्सिंग कॉलेजों की जांच की गई। शिकायत में कहा गया कि सिर्फ चार कमरों में
नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं। न तो कॉलेज में लैब है और न ही 100 बिस्तर का अस्पताल है। कई कॉलेज में तो एक ही फैकल्टी का नाम
लिखा हुआ है। मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद 364 नर्सिंग कॉलेजों की जांच CBI को सौंपी गई। CBI को जांच
सौंपने के बाद लगा कि इसमें कोई बड़े खुलासे होंगे, लेकिन जांच कर रहे अधिकारी ही भ्रष्ट निकलने से कार्रवाई अधर में चली गई। इस जांच
में 169 कॉलेजों को
सूटेबल, 73 नर्सिंग
कॉलेजों को डिफिसेंट और 66 को
अनसूटेबल बताया गया। सूटेबल कॉलेजों की लिस्ट सार्वजनिक होते ही इसकी पड़ताल की गई।
विसिल ब्लोअर और एनएसयूआई के अध्यक्ष रवि
परमार ने शिकायत की कि जिन कॉलेजों
को CBI ने सूटेबल
घोषित किया है, वो नियमों
के खिलाफ हैं। फिर मामले में जांच हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मामले की जांच
कर रहे CBI के अधिकारी
ही भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए। घोटाले की जांच कर रहे CBI के अफसर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए। नर्सिंग घोटाले के
व्हिसल ब्लोअर रवि परमार की शिकायत पर CBI दिल्ली की
टीम ने अधिकारी को पकड़ा था। दिल्ली CBI ने इंदौर, भोपाल, रतलाम समेत
अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। CBI के
इंस्पेक्टर राहुल राज 10 लाख रुपए
की रिश्वत लेते पकड़े गए। उन्होंने नर्सिंग कॉलेज को क्लीन चिट देने के बदले
रिश्वत मांगी थी।
राहुल राज के घर से तलाशी में 7 लाख 88 हजार कैश
और दो गोल्ड के बिस्किट भी बरामद किए गए। राहुल राज को रिश्वत देने वाले भोपाल
स्थित मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग के चेयरमैन अनिल भास्करन, प्रिंसिपल सुमा भास्करन और एक दलाल सचिन जैन को भी CBI ने गिरफ्तार कर लिया। मामले में CBI की ओर से सिर्फ जानकारी उपलब्ध कराई गई कि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कुछ CBI के अफसर भी
शामिल हैं। दिल्ली CBI ने दो
इंस्पेक्टर समेत 13 आरोपियों
को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा। इसके अलावा रतलाम नर्सिंग कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल
जुगल किशोर शर्मा और भाभा कॉलेज भोपाल के प्रिंसिपल जलपना अधिकारी को भी गिरफ्तार
कर लिया। गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी रविराज भदौरिया के ठिकाने से CBI ने 84.65 लाख रुपए
की जब्ती की, जबकि
प्रीति तिलकवार के ठिकाने से करीब एक लाख रुपए और डायरी मिले। मामले में विभाग की
ओर से चुप्पी साध ली गई है। वहीं सरकार का कहना है कि CBI अपनी जांच कर रही है। किसने घोटाला किया और कब किया ये सब जांच
में सामने आ जाएगा, लेकिन
सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है, जिसका मतलब
है कि अपराधी जो भी हो, सलाखों के
पीछे जरूर जाएगा।


