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- फर्जी कास्ट सर्टिफिकेट {SC-ST-OBC} बनाने का गोरखधंधा, मजिस्ट्रेट सहित 4 आरोपी गिरफ्तार….
Posted by : achhiduniya
15 June 2024
दिल्ली कैंट स्थित रेवेन्यू डिपार्टमेंट में बतौर
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यरत एक अधिकारी की मिलीभगत से फर्जी SC-ST और
OBC सर्टिफिकेट
बनाने का गोरखधंधा
हो रहा था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी मजिस्ट्रेट समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार
किया। जिन लोगों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है उनमें मजिस्ट्रेट नरेंद्र
पाल सिंह सहित सौरभ गुप्ता, चेतन
यादव और वारिस अली का नाम शामिल है। इनके पास से सैकड़ों जाली कास्ट सर्टिफिकेट भी बरामद किए गए हैं।
डीसीपी राकेश पावरिया ने बताया कि क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज टीम को गुप्त
सूत्रों से एक सूचना प्राप्त हुई थी, जिसमें
उन्हें पता चला कि जालसाजों का एक गिरोह लोगों को जाली कास्ट
सर्टिफिकेट बना कर
देता है। इस सूचना पर काम करते हुए पुलिस टीम ने 13 मार्च को एक फर्जी आवेदक को जनरल कैटेगरी का था, उसे ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आरोपी के पास भेजा।
जिससे 3500 रुपये
लेकर रेवेन्यू डिपार्टमेंट की तरफ से उसे सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।
डिपार्टमेंट की वेबसाईट पर भी उसे अपलोड कर दिया गया। 20 मार्च को एक और फर्जी आवेदक को तीन हजार रुपये में जाली
ओबीसी सर्टिफिकेट बना कर दिया गया। दोनों ही आवेदकों से आरोपी ने ऑनलाइन पेमेंट
लिया था, जिसके
आधार पर उसके खाते की जानकारी पुलिस ने हांसिल की और 9 मई को संगम विहार में छापेमारी कर उसे दबोच लिया। आरोपी
की पहचान सौरभ के रूप में हुई है।
उसके पास से पुलिस ने एक मोबाइल फोन बरामद किया, जिससे पुलिस को इस जालसाजी से जुड़े कई अहम सबूत मिले। पूछताछ
में आरोपी सौरभ ने खुलासा किया कि जाली सर्टिफिकेट मजिस्ट्रेट ऑफिस से जारी किए
जाते थे। इस मामले में पुलिस ने जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार
कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी के खुलासे के आधार पर पुलिस ने मजिस्ट्रेट ऑफिस
में काम करने वाले चेतन, मजिस्ट्रेट
के ड्राइवर वारिस और मजिस्ट्रेट नरेंद्र पाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों
के कब्जे से पुलिस ने मजिस्ट्रेट के मोबाइल समेत 3 मोबाइल फोन, लैपटॉप, 7 हार्ड डिस्क, 4 स्लाइड
स्टेट ड्राइव, पंपलेट, 1 डिजिटल सिग्नेचर और सैकड़ों कास्ट सर्टिफिकेट बरामद
किए। इस मामले में पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तर कर आगे की जांच में जुट गई है।
साथ ही उक्त अवधि के दौरान डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए 111 कास्ट सर्टिफिकेट की जांच करवा रही है,ताकि यह पता चल
सके कि उनमें कौन सा असली है और कौन सा फर्जी।


