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- मरणोपरांत भी मिलते है पित्रों के कृपादृष्टि व कुदृष्टि के संकेत....?
Posted by : achhiduniya
20 July 2024
मनुष्यों
से जाने-अनजाने में हुए गलत कार्यों
से पूर्वज या पितृ कुपित होते हैं। इसलिए भूलकर भी ऐसा कोई काम नहीं करना, जो पितरों की नाराजगी का कारण बनें। हिंदू धर्म में तो पितरों
को लेकर ऐसी मान्यता है कि, मरणोपरांत भी पितृ अपनी
कृपादृष्टि परिवार पर बनाए रखते हैं. पितृ यदि प्रसन्न होते हैं तो परिवार को सुख-समृद्धि
का आशीर्वाद देते हैं,लेकिन किसी कारण
पितृ नाराज हो जाए तो इससे जीवन में संकट आ सकता है। पितृ नाराज होकर कुछ संकेत देते हैं। तीज-त्योहार या फिर
शुभ कार्यों के दौरान किसी न किसी तरह से खलल पड़ना या अशुभ घटनाएं हो जाना भी
पितरों की नाराजगी का संकेत है. यह इस बात को दर्शाता है कि आपके पितृ असंतुष्ट
हैं।
घर पर पितृ दोष होने से घर के किसी सदस्य का विवाह नहीं हो
पाता है। खासकर ऐसा तब होता है, जब घर पर
किसी ऐसे सदस्य की मृत्यु हुई हो जोकि कुंवारा हो। इसके अलावा किसी दंपती को संतान
न होना भी पितरों की नाराजगी का संकेत होता है। यदि परिवार के किसी सदस्य को
बार-बार पूर्वजों के सपने आते हैं या सपने में आप पूर्वज को दुखी या फिर रोता हुआ
देखते हैं तो इसे अच्छा नहीं माना जाता है। साफ-सफाई के बाद भी यदि घर से बदबू आए
और यह पता न चले की आखिर बदबू कहां से आ रही है,तो यह नाराज पितरों के संकेत हो
सकते हैं।
पितरों के नाराज होने पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन आप कुछ विशेष उपायों को कर नाराज पितृ को
प्रसन्न कर सकते हैं।
इन उपायों से आपके पूर्वज प्रसन्न होंगे और आप सुखी-संपन्न
जीवन व्यतीत करेंगे। पूर्वज नाराज हों तो उनके निमित्त पिंड दान जरूर करें। पूर्वजों
के निमित्त कुआं, तालाब या प्याऊ आदि का निर्माण
कराएं। किसी मंदिर के प्रांगण में बरगद या
पीपल का पेड़ लगाएं और पूजा करें। अमावस्या के दिन पितरों के नाम से दूध, चीनी, कपड़ा या दक्षिणा किसी ब्राह्मण या
जरूरतमंद को दान करें। पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने से भी पितृ दोष
कम होता है।


