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- दिल्ली लाखों लंबित पड़े राशन कार्ड धारको को खाद्य सुरक्षा का मिलेगा लाभ
Posted by : achhiduniya
17 January 2026
दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि खाद्य
सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि गरीबों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि
सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति केवल व्यवस्था की खामियों की वजह
से भूखा न रहे। दिल्ली में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में
सूबे की रेखा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार के मुताबिक राजधानी में अब 1.20
लाख रुपए तक की सालाना पारिवारिक आय वाले
परिवारों को राशन कार्ड का अधिकार मिलेगा, जो पहले एक लाख तक सीमित था। सह फैसला दिल्ली
कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार वर्षों से स्पष्ट
नियमों के अभाव में दिल्ली में 3 लाख 89 हजार 883 से अधिक आवेदन लंबित हैं और 11
लाख 65 हजार 965 से ज्यादा लोग आज भी खाद्य सुरक्षा की प्रतीक्षा
कर रहे हैं, जिन्हें
अब पारदर्शी
और जरूरत-आधारित प्रणाली के तहत शामिल किया जाएगा। सीएम रेखा ने बताया
कि सालों से स्पष्ट नियमों के अभाव में भारी बैकलॉग बना हुआ था। सरकार ने खाद्य सुरक्षा
प्रणाली डेटा की जांच की। इसमें कई गड़बड़ियां पाई गईं। इसके आधार पर उन
लोगों को सूची से हटाया है,जो
वास्तव में इसके हकदार नहीं थे। डेटा वेरिफिकेशन से पता चला कि लगभग 6
लाख 46 हजार 123 ऐसे लाभार्थी सामने आए जिनकी आय जानकारी नियमों
से मेल नहीं खाती थी।
95 हजार 682 ऐसे लोग थे जो लंबे समय से सिस्टम में थे,लेकिन लाभ नहीं ले रहे थे। लगभग 23
हजार 394 नाम दोहराव में पाए गए। 6,185 मामलों में लाभ मृत लोगों के नाम पर दर्ज था। करीब 56
हजार 372 लोगों ने खुद ही सिस्टम से बाहर होने का अनुरोध
किया। इन सभी
कारणों से कुल मिलाकर 8 लाख 27 हजार 756 से अधिक रिक्त स्थान बने। यह भी पता चला कि
वर्तमान में 3 लाख 89
हजार 883 से अधिक आवेदन लंबित हैं और 11
लाख 65 हजार 965 से ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे
हैं। अब इन
खाली जगहों पर वर्षों से राशन कार्ड या खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे लोगों को
शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह केवल नियमों का दस्तावेज नहीं,
बल्कि दिल्ली के सबसे कमजोर वर्गों के लिए
सम्मान,पारदर्शिता
और भरोसे की गारंटी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद भूखा न
रहे और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम करे। सीएम के अनुसार यह
निर्णय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रभावी और न्यायसंगत क्रियान्वयन की दिशा में
लिया गया है। नए नियमों के माध्यम से तकनीक आधारित, न्यायसंगत और पारदर्शी सार्वजनिक वितरण प्रणाली
विकसित की जा रही है, जिससे दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पहले आओ-पहले पाओ की
व्यवस्था समाप्त कर जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से आवेदनों की जांच,
स्वीकृति और क्रमबद्ध प्राथमिकता तय की
जाएगी। इससे
सबसे ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को लिस्ट में आगे स्थान मिलेगा। उन्होंने बताया कि
जिला स्तरीय समिति को प्राथमिकता निर्धारण की केंद्रीय इकाई बनाया गया है। इसकी अध्यक्षता
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) करेंगे। समिति में स्थानीय
विधायक और संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति आवेदनों की जांच कर उन्हें क्रमबद्ध
करेगी ताकि सबसे जरूरतमंद परिवारों को पहले लाभ मिले। साथ ही, 20 प्रतिशत की वेटिंग लिस्ट भी बनाई जाएगी,
जिससे रिक्तियों को समय पर भरा जा सके।


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