घाटों के किनारे दुकान या ठेली लगाने वाले व्यक्तियों के आधार कार्ड की होगी गहन जांच…
सराफा दुकानों में हिजाब, बुर्क़ा, नक़ाब या घूंघट,हेलमेट या मुरेठा पहनकर आने वालों पर बैन....
दीवारों के पार देखना होगा संभव WiFi नेटवर्क की मदद से बिना कैमरा, या खास उपकरण के जरिए....
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की नजर अब भारत के छोटे बच्चों पर
UP- BJP एक महीने में 4 करोड़ नए वोटर बनाने की कोशिश में….
BJP- AIMIM ने मिलाया हाथ
बहुल मुस्लिम छात्र एडमिशन बना विवाद श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द……
बड़ी घाँघली बीजेपी के बागी नेता ने किया नकली AB फॉर्म अटैच चुनाव आयोग ने किया एक्सेप्ट
ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा करने वाला जीआरपी थानाध्यक्ष ही निकला डकैत
कहां पर है नदियों का मायका क्यू दी जाती है महिला नामों की संज्ञ...?
गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम का हिस्सा माना जाता है, जहां अदृश्य सरस्वती नदी भी मिलती है। भारतीय लोगों की मान्यता के मुताबिक, भारत की सनातन संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी, पालनहार, माता स्वरूप और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। ठीक वैसे ही जैसे मां जीवन देती है नदियां भूमि को उपजाऊ बनाती हैं और जीवन का पोषण करती हैं, इसलिए उन्हें मां (माता) के रूप में पूजते हैं, जैसे 'गंगा मैया' या 'नर्मदा मैया'। यह भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी के समान दर्जा देने और उनकी जीवन-पोषण क्षमता से जुड़ा है, हालांकि ब्रह्मपुत्र जैसी कुछ नदियां पुरुषवाचक मानी जाती हैं। इसलिए स्त्रीलिंग नाम दिए गए हैं जबकि ब्रह्मपुत्र और सोन जैसी नदियां अपनी विशालता और शक्ति के कारण पुरुष रूप में हैं। नदियों का मायका मध्य प्रदेश को कहा जाता है, क्योंकि यहां से नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, सोन और माही जैसी कई प्रमुख नदियां निकलती हैं और यह राज्य देश की कई बड़ी नदियों का उद्गम स्थल है, इसलिए इसे नदियों का मायका कहते हैं।
चुनावी कवरेज-मीडिया बरते संयम राज्य चुनाव आयोग के मीडिया को दिए गए निर्देश
झूठी आलोचना न करें। उम्मीदवारी या आवेदन वापस लेने के संबंध में झूठी खबरें प्रकाशित न करें। बिना सत्यापन के कोई भी आरोप प्रकाशित न करें। बिना सबूत के और झूठी जानकारी के आधार पर किसी को बदनाम न करें। मीडिया को किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए किसी भी प्रकार का प्रलोभन, चाहे वह वित्तीय हो या अन्य, स्वीकार नहीं करना चाहिए। किसी भी उम्मीदवार या दल द्वारा या उनकी ओर से दी गई किसी भी प्रकार की मेहमाननवाजी या अन्य सुविधाओं को स्वीकार न करें। मीडिया को किसी विशेष उम्मीदवार या पार्टी के प्रचार को जगह नहीं देनी चाहिए,लेकिन अगर वह ऐसा करता है, तो उसे अन्य उम्मीदवारों या पार्टियों को भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए। मीडिया को सत्ताधारी पार्टी या सरकार के प्रदर्शन से संबंधित राज्य कोष के खर्च पर भुगतान किए गए किसी भी विज्ञापन को स्वीकार या प्रकाशित नहीं करना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मीडिया को राज्य चुनाव आयोग , रिटर्निंग ऑफिसर या मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों, आदेशों और हिदायतों का पालन करना चाहिए।
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